चांडिल. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की स्पेशल रैपोर्टियर सुचित्रा सिन्हा ने शनिवार को नीमडीह प्रखंड के सीमा गांव का दौरा किया. उन्होंने चांडिल बांध बहुउद्देशीय परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास स्थल का निरीक्षण किया और सीमा मध्य विद्यालय परिसर में विस्थापितों के साथ बैठक कर उनकी गंभीर समस्याओं व शिकायतों का जायजा लिया. इस दौरान विस्थापितों ने भूमि अधिग्रहण, लंबित मुआवजा, जमीन का पट्टा और मूलभूत सुविधाओं से संबंधित दस्तावेज उन्हें सौंपे.
42 वर्षों बाद भी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे विस्थापित
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुचित्रा सिन्हा ने कहा कि चांडिल बांध परियोजना को लगभग 42 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार अपने मूल अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कई परिवारों को उचित मुआवजा, विकास पुस्तिका का लाभ और पुनर्वास स्थल पर भूमि तक नहीं मिली है. जिन्हें भूमि मिली, उन्हें विधिवत पट्टा नहीं दिया गया, जो पूरी पुनर्वास प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है. उन्होंने प्राप्त सभी आवेदनों का तथ्यात्मक परीक्षण कर रिपोर्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी जाएगी.
दोषी अधिकारियों पर तय होगी जवाबदेही
मानवाधिकार आयोग ने विस्थापितों के प्रति प्रशासन के ढुलमुल रवैए पर कड़ा रुख अपनाया है. सुचित्रा सिन्हा ने चेतावनी दी कि यदि जांच में संबंधित विभागों या अधिकारियों द्वारा गंभीर अनियमितता, लापरवाही अथवा भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो स्वतंत्र जांच की अनुशंसा की जाएगी. उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मामले की सीबीआइ जांच की सिफारिश भी की जा सकती है. आयोग का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि विस्थापितों को संविधान के तहत समयबद्ध तरीके से अधिकार दिलाना और दोषियों की जवाबदेही तय करना है. बैठक व निरीक्षण के दौरान पुनर्वास पदाधिकारी सुखदेव महतो, बड़ा बाबू दारा प्रसाद मंडल, विस्थापित अधिकार मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो, गुंडा पंचायत के मुखिया बूका सिंह सहित बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार और विभागीय कर्मी उपस्थित थे.
