राजनगर : राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सह स्थानीय विधायक चंपाई सोरेन ने मंगलवार को राजनगर में प्रेस वार्ता कर सरायकेला के बिरसा मुंडा स्टेडियम का नाम बदलने की आशंका पर स्पष्ट रुख रखा. उन्होंने कहा कि स्टेडियम का नाम किसी भी हाल में नहीं बदला जाना चाहिए. दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित किए जाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रतिमा स्थापना के बहाने किसी स्थान के मूल नाम में बदलाव करना उचित नहीं है.
गुरुजी की प्रतिमा के लिए कई महत्वपूर्ण स्थान उपलब्ध
पूर्व सीएम ने कहा कि वह दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना के खिलाफ नहीं हैं. प्रतिमा के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण स्थान हैं, जहां गुरुजी की सम्मानपूर्वक प्रतिमा स्थापित की जा सकती है. उन्होंने कहा कि जमशेदपुर जैसे प्रमुख शहर में भी गुरुजी की प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी उनके संघर्ष और विचारों से प्रेरणा ले सके.
बिरसा, सिदो-कान्हू और पोटो हो के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता
चंपाई सोरेन ने कहा कि वह झारखंड आंदोलन के दौरान शिबू सोरेन के मुख्य शिष्यों में रहे हैं और आज भी गुरुजी के आदर्शों पर चलते हैं. उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू और पोटो हो जैसे महापुरुषों के संघर्ष और बलिदान को इतिहास से मिटाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को आगे बढ़ाने में झामुमो और शिबू सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. गुरुजी ने महाजनी प्रथा और अन्याय के खिलाफ लंबा संघर्ष किया है, इसलिए उनका सम्मान भी उतना ही जरूरी है.
सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश नहीं
गौरतलब है कि बिरसा मुंडा स्टेडियम के समक्ष शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना के लिए हाल में झामुमो की ओर से भूमि पूजन किया गया था. इसके बाद कुछ आदिवासी सामाजिक संगठनों ने स्टेडियम का नाम बदले जाने की आशंका जताई है. हालांकि, नाम बदलने को लेकर सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक आदेश या अधिसूचना जारी नहीं हुई है. संगठनों ने 18 सितंबर को विरोध-प्रदर्शन कर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की है.
