सरायकेला : भगवान वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम, सरायकेला में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित करने के निर्णय के विरोध में चल रहा ‘वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान’ आंदोलन समाप्त कर दिया गया. आंदोलनकारियों ने झामुमो जिला कमेटी द्वारा स्टेडियम परिसर में प्रतिमा स्थापित नहीं करने के निर्णय का स्वागत करते हुए आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की.
गणेश महाली ने भी फैसला वापस लेने की बात कही थी
प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उलगुलान समिति के सावन सोय, बिष्णु बानरा, गणेश गागराई ने संजुक्त रूप से बताया - 16 सितंबर को झामुमो जिला कमेटी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाध्यक्ष डॉ. शुभेंदु महतो समेत अन्य नेताओं ने स्टेडियम परिसर में प्रतिमा नहीं लगाने तथा इसके लिए अन्य उपयुक्त स्थान का चयन करने की घोषणा की थी. झामुमो के सरायकेला विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी गणेश महाली ने भी प्रतिमा स्थापना का फैसला वापस लेने की बात कही थी.
मतभेद व टकराव की स्थिति उत्पन्न होने की थी आशंका
आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका विरोध दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सम्मान के खिलाफ नहीं था, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के नाम और पहचान से जुड़े स्टेडियम परिसर में प्रतिमा स्थापित किए जाने के निर्णय को लेकर था. उनका कहना था कि सामाजिक संगठनों और समाज के प्रतिनिधियों से राय लिए बिना इस तरह का निर्णय लेना उचित नहीं है. इससे समाज में अनावश्यक मतभेद और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी.
लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया आंदोलन : आंदोलनकारी
आंदोलनकारियों ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया. स्टेडियम की गरिमा और भगवान बिरसा मुंडा की पहचान को लेकर उठाई गई आवाज का उद्देश्य पूरा होने के बाद आंदोलन समाप्त किया जा रहा है.प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावन सोय, मानसिंह मुंडा, दिवाकर सरदार, एमपी सरदार, झारखंड बोदरा, विष्णु बानरा, गणेश गागराई, सुखराम सोय, रामचंद्र मुंडा, साधु हो, टाटा चातर, रामलाल हेम्ब्रम, रंजीत सरदार, गणेश सरदार, अभिमन्यु सरदारऔर वीर सिंह सिजुई समेत अन्य आंदोलनकारी उपस्थित थे.
