सरायकेला : बारिश में सरायकेला जिले में सांप काटने के मामले तेजी से बढ़े हैं. सरायकेला सदर अस्पताल के अनुसार, वर्ष 2024 में सर्पदंश के 256 मरीज अस्पताल पहुंचे. इनमें सबसे ज्यादा 76 मामले जुलाई और 43 मामले जून में आये थे. वर्ष 2025 में आंकड़ा बढ़कर 332 हो गया. वहीं, वर्ष 2026 में अब तक 250 मरीज अस्पताल पहुंचे हैं. इसमें जून माह में 67 और जुलाई में 53 मामले दर्ज आये हैं.
इस वर्ष दो बच्चों की हो चुकी है मौत
इस वर्ष खरसावां के सांतारी गांव में सगे भाई-बहन की सांप काटने से मौत हो गयी थी. वहीं, विगत वर्ष 2025 में राजनगर में दो और गम्हरिया में एक व्यक्ति की सर्पदंश से जान चली गयी थी. जिले के स्नेक कैचर राजा बारीक ने बताया - सर्पदंश के सबसे अधिक मामले बारिश शुरू होने से ठीक पूर्व और वर्षा ऋतु के दौरान आते हैं. अक्सर सांप जमीन के अंदर बिल बनाकर रहते हैं. बारिश के कारण बिलों में पानी भर जाने पर वे सुरक्षित स्थान की तलाश में बाहर निकलते हैं. गर्मी के मौसम में हल्की बारिश होने पर गर्म धरती और उमस से निजात पाने के लिए भी सांप बाहर आते हैं.
सभी सीएचसी में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह ने कहा कि सदर अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है. सांप काटने की स्थिति में अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें. सर्पदंश के 6 घंटे के भीतर मरीज को एंटी स्नेक वेनम देना अनिवार्य होता है, अन्यथा जान का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.
सांपों से बचाव के उपाय
बारिश के मौसम में सांपों का खतरा बढ़ जाता है. सांपों से बचाव के लिए घर और आसपास साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है. घर के आसपास झाड़ियां, कूड़ा-कचरा और पत्थरों के ढेर न जमा होने दें. रात में बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च का इस्तेमाल करें और बंद जूते पहनें. जमीन पर सोने से बचें. सोने से पहले बिस्तर और कपड़ों की अच्छी तरह जांच कर लें. घर के दरवाजे और खिड़कियों के आसपास मौजूद खाली जगहों को बंद रखें. यदि घर में सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश नहीं करें. सुरक्षित दूरी बनाए रखें और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें. सांप के काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें. काटे गए स्थान पर चीरा लगाना, जहर चूसना या कसकर पट्टी बांधना नुकसानदायक हो सकता है.
