सरायकेला : सरायकेला, सीनी सहित आसपास महतो व संथाल बहुल ग्रामीण क्षेत्र में गोरू खुंटा (बैल नचाने) पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया. बैलों के सम्मान में आयोजित इस पर्व में पहले गाय व बैलों की पूजा- अर्चना कर पशुओं को विभिन्न प्रकार के पकवान खिलाये गये.
इसके पश्चात गांव के चौराहे पर बांध कर मांदर की थाप पर नचाया गया. किसान बैलों को कृषि कार्य में सहायक मानते हैं दीपावली के दूसरे दिन अर्थात बंदना पर्व पर गाय रखने के स्थान पर पूजा- अर्चना कर गाय व बैलों की पूजा-अर्चना की जाती है. जबकि दीपावली के तीसरे दिन पशुओं को गांव के चौराहे पर बांध कर मांदर की थाप पर नचाया जाता है. ऐसा गाय बैलों के सम्मान में आयोजित किया जाता है.
इस संबंध में बांधडीह गांव के अमुल्यो महतो ने बताया कि गोरू खुंटा पर्व प्रत्येक महतो व संथाल बहुल गांवों में मनाया जाता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है.
