प्रभु जगन्नाथ का हुआ भव्य श्रृंगार

रथयात्रा कल : धूमधाम से मना नेत्र उत्सव, 45 दिनों के बाद खुले मंदिरों के कपाट खरसावां : भक्तों के समागम, जय जगन्नाथ की जयघोष, शंखध्वनी व पारंपरिक उलध्वनी हुलहुली के बीच गुरुवार को देर शाम प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा का नेत्र उत्सव संपन्न हुआ. इस मौके पर भक्तों को चतुर्थ मूर्ति के […]

रथयात्रा कल : धूमधाम से मना नेत्र उत्सव, 45 दिनों के बाद खुले मंदिरों के कपाट
खरसावां : भक्तों के समागम, जय जगन्नाथ की जयघोष, शंखध्वनी व पारंपरिक उलध्वनी हुलहुली के बीच गुरुवार को देर शाम प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा का नेत्र उत्सव संपन्न हुआ. इस मौके पर भक्तों को चतुर्थ मूर्ति के नये रुप के अलौकिक दर्शन भी हुए. नेत्र उत्सव को रथ यात्रा का प्रथम व महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है.
गुरुवार को तीन पखवाड़े के बाद सरायकेला-खरसावां जिले के सभी जगन्नाथ मंदिर के कपाट खुले. 45 दिनों तक मंदिर के गर्भ गृह में रहने के बाद चतुर्थ मूर्ति बाहर निकल कर भक्तों को दर्शन किये. प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा व सुदर्शन के दर्शन को बड़ी संख्या में भक्त मंदिरों में पहुंचे थे. चतुर्था मूर्ति का विशेष श्रंगार किया गया था. इस मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गयी. खरसावां के राजमहल स्थित जगन्नाथ मंदिर के अलावा हरिभंजा, सरायकेला के मंदिर में भी नेत्र उत्सव पर विशेष आयोजन किया गया था. हरिभंजा में भंडारा का आयोजन कर सैकड़ों भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया.
काफी संख्या में भक्त यहां पहुंच कर कतारबद्ध हो कर प्रसाद ग्रहण किया. शुक्रवार को आभा यात्रा पर प्रभु के नव यौवन रूप के दर्शन भी होंगे. मान्यता है कि दो जून को स्नान पूर्णिमा के दिन अत्यधिक स्नान करने के बाद प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा बीमार पड़ जाते है. 45 दिनों तक मंदिर के गर्भ गृह में उनका इलाज चलता है और नेत्र उत्सव के दिन पूरी तरह से स्वस्थ होते है. मान्यता है कि नेत्र उत्सव के दिन प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा को अपने मौसीबाड़ी से निमंत्रण मिलता है और वे मौसी घर जानें की तैयारी करते है.
रथ यात्रा के दिन प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा अपने मौसी घर जायेंगे. नेत्र उत्सव पूजा के साथ ही रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत मानी जाती है. दो दिनों के बाद 18 जुलाई को प्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार हो कर मौसीबाड़ी के लिये रवाना होंगे.
रथ यात्रा ही एक मात्र ऐसा मौका होता है, जब प्रभु भक्तों को दर्शन देने के लिये मंदिर से बाहर निकलते है. मान्यता है कि रथ पर प्रभु के दर्शन मात्र से ही सभी पापों से मुक्ति मिलती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >