खरसावां : खरसावां अग्र परियोजना केंद्र परिसर में अग्र परियोजना पदाधिकारी सुशील कुमार ने खरसावां व कुचाई के रेशम दूतों में 10 हजार तसर अंडा (डीएफएल) का वितरण किया. पिछले चार पांच दिनों से लगातार हो रही बारिश के बाद से ही डीएफएल का उत्पादन तेज हो गया है.
खरसावां में प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार डीएफएल का उत्पादन हो रहा है. कोल्हान ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में सर्वाधिक तसर की खेती खरसावां व कुचाई क्षेत्र में होती है. खरसावां के अग्र परियोजना केंद्र स्थित बीजागार में 2.5 लाख सीड कोकून रखा गया है.
इसी सीड कोकून से तसर की तितली निकल कर अंडा (डीएफएल ) तैयार कर रही है. अग्र परियोजना पदाधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि 2.5 लाख सीड कोकून से कम से कम 50 हजार तसर अंडा का उत्पादन होगा. साथ ही अन्य जगहों से भी 30 हजार तसर के अंडों को दूसरे क्षेत्र से मंगाया जायेगा तथा रेशम दूतों में वितरण किया जायेगा. इन्हीं डीएफएल से खरसावां व कुचाई में तीन सौ रेशम दूत तसर का कीट पालन करेंगे.
रेशम दूत अंडों से कीटपालन कर अगले तीन माह में पुन अंडा तैयार करेंगे. रेशम दूतों द्वारा तैयार अंडों को क्षेत्र के करीब छह हजार तसर किसानों में वितरण किया जायेगा. तसर किसान इन अंडों से अपने खेतों में लगे अजरुन व आसान पेड में कीटपालन करेंगे. इस वर्ष छह करोड़ तसर कोसा के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. अग्र परियोजना पदाधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि अगर मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष छह करोड़ के आस पास तसर कोसा का उत्पादन होगा.
खरसावां व कुचाई के तसर किसानों को भी नये तकनीक से तसर की खेती के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है. अब तक डेढ़ सौ किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि कुल एक हजार किसानों को प्रशिक्षण देने की योजना है. इस प्रशिक्षण से भी किसानों को काफी लाभ मिलेगी.
