18 जुलाई को मौसी बाड़ी जायेंगे जगन्नाथ

खरसावां : सरायकेला खरसावां में वार्षिक रथ यात्र को लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. 18 जुलाई को प्रभु जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार हो कर मौसी के घर जायेंगे. खरसावां के अलावा जिला में मुख्य रुप से खरसावां के ही हरिभंजा, दलाईकेरा, बंदोलौहर, जोजोकुड़मा, सीनी, सरायकेला, […]

खरसावां : सरायकेला खरसावां में वार्षिक रथ यात्र को लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. 18 जुलाई को प्रभु जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार हो कर मौसी के घर जायेंगे. खरसावां के अलावा जिला में मुख्य रुप से खरसावां के ही हरिभंजा, दलाईकेरा, बंदोलौहर, जोजोकुड़मा, सीनी, सरायकेला, गम्हरिया व चांडिल में रथ यात्र का आयोजन होता है.
परंपरा के अनुसार दो जून को देवस्नान पूर्णिमा में अत्याधिक स्नान के पश्चात प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा बीमार हो गये है. फिलहाल उनका उपचार जड़ी बूटी दे कर मंदिर के गर्भ गृह में किया जा रहा है. इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं का रंगाई पुताई की जा रही है. 16 जुलाई को नेत्र उत्सव के रात भगवान जगन्नाथ नव यौवन रुप के दर्शन होंगे.
नेत्र उत्सव के दिन उनका भव्य श्रंगार किया जायेगा. नेत्र उत्सव के दो दिन बाद 18 जुलाई को प्रभु जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ रथ पर सवार हो कर अपने मौसी के घर जायेंगे. रथ पर सवार हो कर मौसी के घर जाने की परंपरा को रथ यात्र उत्सव कहा जाता है. ओड़िया बहुल क्षेत्र होने के कारण इसे क्षेत्र का सबसे बड़ा त्योहार के रुप में मनाया जाता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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