शचिंद्र कुमार दाश
खरसावां : झारखंड के ओड़िया बहुल क्षेत्रों में उत्कल सम्मेलनी ओड़िया भाषा में शिक्षा का अलख जगा रही है.संस्थान की ओर से मानदेय पर शिक्षक बहाल कर ओड़िया स्कूलों में पठन-पाठन कराया जा रहा है. संस्थान को शिक्षकों का मानदेय ओड़िशा सरकार उपलब्ध कराती है. सिंहभूम के कई विद्यालयों में ओड़िया भाषा के शिक्षक नहीं है. ऐसे में सम्मेलनी की ओर से इन विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति कर अपनी मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध करा रही है.
सम्मेलनी की ओर से सरायकेला-खरसावां जिला में 43, पश्चिमी 52 व पूर्वी सिंहभूम जिला में 65 ओड़िया शिक्षकों की नियुक्ति कर ओड़िया विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य कराया जा रहा है. सम्मेलनी की ओर से चार राज्य झारखंड, पं बंगाल, छत्तीसगढ़ व आंध्रा प्रदेश में ओड़िया पढ़ रहे बच्चों को नि:शुल्क रूप से ओड़िया पुस्तक उपलब्ध करा रही है. झारखंड में ओड़िया भाषा को द्वितीय राजभाषा का दरजा मिले करीब दो साल होने को है, परंतु जमीनी स्तर पर इसका कोई खास लाभ मिलता नहीं दिख रहा है.
कोल्हान में बड़े पैमाने पर ओड़िया समुदाय के लोग निवास करते हैं. काफी संख्या में ऐसे भी लोग हैं, जो अपने बच्चों को मातृभाषा में पढ़ाना चाहते हैं, परंतु ओड़िया भाषा के शिक्षकों की कमी के कारण स्कूलों में वे अपने बच्चों का पठन-पाठन तक नहीं करा पा रहे हैं. इतना ही नहीं उत्कल सम्मेलनी के शिक्षक गांवों में जाकर ओड़िया भाषा, साहित्य व संस्कृति का प्रचार-प्रचार भी कर रहे हैं. लोगों को अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा में पढ़ाने के लिये जागरूक भी कर रहे हैं.
कई ओड़िया स्कूलों में शिक्षक नहीं होने के कारण अनुबंध में सामाजिक संगठन उत्कल सम्मेलनी की ओर से शिक्षक बहाल पर पठन-पाठन का कार्य कराया जा रहा है. सरायकेला, खरसावां समेत पूरे झारखंड के अधिकांश विद्यालयों में ओड़िया भाषा में शिक्षा का अलख इन दिनों ओड़िशा (भुवनेश्वर) के सामाजिक संगठन उत्कलसम्मेलनी जगा रही है.
