प्रताप मिश्रा, सरायकेलादेश के आजादी के पश्चात ओडि़शा को अलग कर सरायकेला रियासत का तत्कालीन बिहार राज्य में विलय हुआ और वर्ष 1952 में पहली बार बिहार राज्य में विस का चुनाव हुआ तो सरायकेला से मिहिर कवि विधायक बने. उस समय यह सीट अनारक्षित हुआ करता था. वे स्वतंत्र पार्टी से जीत हासिल कर विधायक बने थे. इसके बाद हुए चुनाव में राजघराने के सदस्य भी विधायक चुन कर विधानसभा को पहुंचे. इस सीट पर राजनीति के भीष्म पितामह सिंहभूम शेर स्व रुद्र प्रताप षाड़ंगी भी चुनाव जीत कर विधायक बने हैं. सरायकेला विधानसभा वर्ष 1977 के पूर्व तक अनारक्षित था इसके बाद इससे अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया. आरक्षित सीट पर पहली बार 1977 में कादे मांझी जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीत कर विधानसभा को पहुंचे थे. वे लगातार दो बार विधायक बने. सरायकेला विस में सबसे कम वोट से जीतने का रिकार्ड वर्ष 1972 में सतभानु सिंहदेव के नाम पर है. उन्होंने मात्र 299 वोट से जीत हासिल की थी और विधायक बने थे. सरायकेला विस में अब तक के विधायक एक नजर मेंवर्ष 1952 महिर कवि (स्वतंत्र पार्टी)वर्ष 1957 राजा आदित्यप्रताप सिंहदेव (स्वतंत्र पार्टी)वर्ष 1962 टिकैत नृपेंद्र नरायण सिंहदेव (स्वतंत्र पार्टी)वर्ष 1967 रुद्र प्रताप षाडंगी (जनसंघ)वर्ष 1969 वनबिहारी महतो (अखिल भारतीय झारखंड पार्टी)वर्ष 1972 सतभानु सिंहदेव(कांग्रेस)वर्ष 1977 कादे मांझी (जनता पार्टी)वर्ष 1980 कादे मांझी (जनता पार्टी)वर्ष 1985 कृष्णा मार्डी (झामुमो)वर्ष 1990 कृष्णा मार्डी (झामुमो)वर्ष 1991 चंपाई सोरेन (झामुमो)वर्ष 1995 चंपाई सोरेन (झामुमो)वर्ष 2000 अनंतराम टुडु (भाजपा)वर्ष 2005 चंपाई सोरेन (झामुमो)वर्ष 2009 चंपाई सोरेन (झामुमो)
सरायकेला के पहले विधायक बने थे मिहिर कवि
प्रताप मिश्रा, सरायकेलादेश के आजादी के पश्चात ओडि़शा को अलग कर सरायकेला रियासत का तत्कालीन बिहार राज्य में विलय हुआ और वर्ष 1952 में पहली बार बिहार राज्य में विस का चुनाव हुआ तो सरायकेला से मिहिर कवि विधायक बने. उस समय यह सीट अनारक्षित हुआ करता था. वे स्वतंत्र पार्टी से जीत हासिल कर […]
