खरसावां.खरसावां प्रखंड के डेमकागोड़ा (सिलपींगदा) में 15वां वनाधिकार स्थापना दिवस मनाया गया. वन संसाधनों के उपयोग एवं संरक्षण के लिए गांव के प्रवेश स्थाल पर बोर्ड के रूप में गाडे़ गये पत्थल पर ग्राम मुंडा बोसेन मुंडा ने पारंपरिक रूप से पूजा की. मौके पर सामुदायिक वन पालन संस्थान के सोहनलाल कुम्हार ने बताया कि 3 मार्च 2013 को गांव के कुल 1213.56 एकड़ वनभूमि पर सरकार ने वनाधिकार प्रमाण पत्र ग्रामीणों को दिया है. सोहन लाल ने कहा कि 2013 से पहले इस क्षेत्र में जंगलों का घनत्व बहुत कम था. लेकिन वनाधिकार प्रमाण पत्र मिलने के बाद वनाश्रित समुदाय में जंगलों के प्रति अपनत्व की भावना बढ़ी. इसके परिणामस्वरूप जंगलों का संरक्षण हुआ और वर्तमान में वनों का घनत्व काफी बढ़ गया है.
महुआ या केंदुपत्ता चुनने के लिए जंगल में आग न लगाएं
सोहनलाल कुम्हार ने वनाश्रितों को जागरूक करते हुए कहा कि वैध फसलों की खेती करें. जंगल में महुआ चुनने या केंदु पत्ता की मात्रा बढ़ाने या शिकार करने के लिए जंगलों में आग न लगाएं. साथ ही किसी भी वन्यजीव को नुकसान न पहुंचाएं. जैव विविधता के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि जंगल से ही हमारा अस्तित्व जुड़ा है. हर हाल में जंगल की रक्षा की जायेगी.
जलवायु संतुलन के लिए जरूरी है जंगलों का संरक्षण
ग्रामसभा के भरतसिंह मुंडा ने जंगलों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि वनों के विनाश के कारण जलवायु परिवर्तन में निरंतर असंतुलन हो रहा है. जंगलों के कारण ही स्वच्छ हवा और संतुलित जलवायु बनी रहती है, जिससे नियमित बारिश होती है. इस अवसर पर भरत सिंह मुंडा, वोसेन मुंडा, बुधराम गोप, बबलू मुर्मू, सुखराम सरदार सहित कई ग्रामीण मौजूद थे. इस दौरान लोगों ने पारंपरिक रूप से नृत्य गीत के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
