साहिबगंज में बदला मौसम का मिजाज, छह दिनों में ही हुई 85 मिमी बारिश

मई माह का अभी 25 दिन बाकी, गरज, बारिश और बिजली का तिहरा वार

साहिबगंज. मई माह का नाम आते ही जहां आमतौर पर भीषण गर्मी, लू और तपती सड़कों की तस्वीर सामने आती है. वहीं इस बार मौसम ने पूरी तरह से करवट ले ली है. अप्रैल खत्म होते ही मई माह के शुरुआत में ही साहिबगंज में बारिश, आंधी और गरज-चमक का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसने पिछले कई दशकों के ट्रेंड को चुनौती दे दी है, जिले में मात्र छह दिनों के भीतर करीब 85 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि अभी पूरे महीने के 25 दिन बाकी हैं. भारतीय मौसम विभाग पहले ही इस बात का अलर्ट जारी कर चुका है कि इस बार मई माह में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. वर्ष 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में औसतन 61.4 मिमी बारिश होती रही है, लेकिन इस बार शुरुआती सप्ताह में ही यह आंकड़ा पार होने की स्थिति बन गयी है. इससे साफ है कि मौसम का पारंपरिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है.

साहिबगंज में मौसम का मिजाज है अस्थिर

साहिबगंज में बीते कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बेहद अस्थिर बना हुआ है. सुबह तेज धूप निकलती है, लेकिन दोपहर या शाम होते-होते अचानक आसमान में काले बादल छा जाते हैं. और तेज हवाओं के साथ मूसलधार बारिश शुरू हो जाती है. कई बार स्थिति आंधी-तूफान में बदल जाता है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है .

आंधी-तूफान का असर, गिरे पेड़, बिजली हुई बाधित

बुधवार की सुबह करीब 10 बजे आई तेज आंधी और भारी बारिश ने जिले के कई इलाकों में नुकसान पहुंचाया. तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर पेड़ उखड़ गये और डालियां टूटकर सड़कों पर गिर पड़ी, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ. कुछ कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचा है. बिजली व्यवस्था पर भी असर पड़ा है. कई इलाकों में घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा. शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलजमाव की स्थिति बन गयी है.

खेत में काम कर रहे किशोर की वज्रपात से मौत

सबसे गंभीर खतरा आसमानी बिजली (वज्रपात) के रूप में है. बुधवार को खेत में काम कर रहे एक किशोर की बिजली गिरने से मौत हो गयी. बताया जाता है कि किशोर अपने परिजनों के साथ खेत में कार्य कर रहा था. इसी दौरान अचानक मौसम बिगड़ी और तेज गरज के साथ बिजली गिरी, जिसकी चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गयी. इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया. लगातार हो रही वज्रपात की घटनाओं ने लोगों में डर का माहौल बना दिया है.

किसानों के लिए चिंता, आम लोगों के लिए चुनौती

बदले हुए मौसम का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है. मक्का और सब्जियों की खेती के लिए यह समय महत्वपूर्ण होता है, लेकिन लगातार बारिश और तेज हवाओं से फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गयी है. दूसरी ओर, आम लोगों को भी दोहरी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. एक तरफ गर्मी से राहत मिली है, तो दूसरी तरफ बारिश, कीचड़, जलजमाव और बिजली कटौती जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं. दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है.

मौसम विभाग का अलर्ट और प्रशासन की अपील

भारतीय मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं जारी रहने की संभावना जताई है. खासकर वज्रपात को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है. जिला प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें. खेतों, खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे रहने से बचें.

कहते हैं मौसम वैज्ञानिक

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह का बदलाव अचानक नहीं होता, बल्कि यह लंबे समय में विकसित होने वाली प्रक्रिया का परिणाम होता है. आमतौर पर मौसम का पैटर्न 30 से 50 वर्षों के भीतर धीरे-धीरे बदलता है, लेकिन अब यह बदलाव तेजी से दिखाई दे रहा है.

-डॉ वीरेंद्र कुमार मेहता, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र

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By Abdhesh singh

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