पहले की तुलना में जिले में टीबी मरीजों की संख्या में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी होना चिंता का विषय है. इधर, शासन-प्रशासन भी इसे जड़ से खत्म करने के लिए सुनियोजित तरीके से काम कर रही है. ताकि इसे जल्द से जल्द जड़ से खत्म किया जा सके. पहले टीबी को लाइलाज माना जा रहा था. पर अब इसका सफल इलाज किया जा रहा है. चिकित्सक की माने तो टीबी रोगियों द्वारा नियमित दवा का सेवन करे तो 95 फीसदी रोगी पूरी तरह ठीक हो सकता है. सरकार द्वारा टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है. इसको लेकर देश व राज्य स्तर से लेकर ग्रामीण स्तर पर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. रोगियों को चिह्नित कर नि:शुल्क दवाइयां दी जा रही है. आर्थिक बोझ को कम करने के लिए सहायता राशि दी जा रही है. टीबी रोग को जड़ खत्म करने एवं टीबी रोगियों को बचाने को लेकर सरकार अरबों रुपये खर्च कर रही है. सरकार व विभाग लगातार जागरुकता अभियान, नि: शुल्क जांच, नि:शुल्क दवाइयां दी जाती है. टीबी रोगियों को सहायता राशि भी प्रदान की जाती है. इससे रोगियों पर आर्थिक बोझ कम होता है. टीबी संक्रामक रोग है, जो एक प्रकार की बैक्टीरिया से होता है. यह फेफड़ों को अधिक प्रभावित करता है. यह खांसने, छींकने या बात करते समय हवा के जरिये दूसरों तक फैलने का खतरा रहता है. चिकित्सकों के अनुसार दो सप्ताह से अधिक दिनों तक लगातार खांसी, बलगम में खून आना, हल्का बुखार होना, रात में पसीना, भूख न लगना समेत वजन में कमी होना टीबी का संकेत देता है. यह 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, गर्भवती महिलाओं व बच्चों को टीबी रोग होने का अधिक संभावना होती है. टीबी मुक्त भारत अभियान की तर्ज पर जिले में शासन – प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है. जड़ से खत्म करने के लिए जिला के सभी प्रखंड में अभियान जारी है. इसके अलावा संबंधित विभाग तेजी से कार्य कर रहे हैं. जिला प्रशासन ने कई गांव में रात्रि चौपाल, शिविर समेत अन्य माध्यम से तरीकों से हजारों लोगों की जांच करायी जा रही है. विभागीय रिपोर्ट के अनुसार जिला प्रशासन ने जिला के 15.08 लाख आबादी में से प्रतिवर्ष 45 हजार लोगों की जांच के लिए योजना बनाया गया है. स्वास्थ्य विभाग इस योजना पर लगातार कार्य कर रहे हैं.
निक्षय मित्र बन कर टीबी मरीजों की कर रहे हैं मदद
टीबी मुक्त के लिए सरकार के साथ-साथ आमजन भी आगे आ रहे हैं. राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन समेत अन्य कार्यक्रम के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि बुद्धिजीवी, व्यावसायिक सहित अन्य लोग भी सहयोग कर रहे हैं. निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद लेकर सहयोग कर रहे हैं. इससे टीबी मरीजों को फूड बास्केट, आर्थिक मदद समेत पौष्टिक भोजन देकर उनका देखभाल करते हैं.
कहते हैं सीएस.
विभाग की ओर से लगाये जा रहे विभिन्न शिविर व स्वास्थ्य केंद्र में आकर टीबी की जांच करा सकते हैं. यदि किसी को टीबी रोग पॉजिटिव हो जाये तो घबराने का बात नहीं है. सरकार द्वारा निःशुल्क दवा के साथ आर्थिक मदद दी जाती है.
रामदेव पासवान, जिला सिविल सर्जन
जिले के 1878 मरीजों को मिली 97.73 लाख रुपये की पोषण राशि
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार जिले में जनवरी से अक्तूबर 2025 तक साहिबगंज जिले के कुल 1878 मरीजों को उनके खाते में आर्थिक सहायता (पोषण राशि ) के रूप में कुल 97.73 लाख रुपये दी जा चुकी है, जो इस्टीमेटेड राशि का 85 फीसदी है. इसके अलावा 120 मरीजों ऐसे हैं, जिनके बैंक खाता व कागजी प्रक्रिया पेंडिंग होने से उनके खाते में सहायता राशि नहीं भेजा जा सकी है.
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