साहिबगंज
किसानों की उपज को संरक्षित करने और फल-सब्जियों की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लोहंडा में निर्मित 5000 मीट्रिक टन क्षमता वाला आधुनिक कोल्ड स्टोरेज बदहाली का प्रतीक बन गया है. लगभग नौ करोड़ रुपये की लागत से भवन निर्माण विभाग द्वारा तैयार यह कोल्ड स्टोरेज महीनों से उद्घाटन और संचालन की बाट जोह रहा है. अत्याधुनिक भवन, आधुनिक मशीनरी तथा पीपीपी मोड पर संचालन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद यह योजना अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि मुख्य सड़क से कोल्ड स्टोरेज तक पहुंचने के लिए अप्रोच रोड का निर्माण नहीं हो पाया है. 29 अप्रैल को पीपीपी मोड पर संचालन करने वाली कंपनी ने इसका विधिवत हैंडओवर ले लिया था, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने उसी समय स्पष्ट कर दिया था कि बिना पहुंच पथ के संचालन व्यावहारिक नहीं है. इसके बावजूद नौ महीने बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन और संबंधित विभाग सड़क निर्माण कराने में असफल है. परिणामस्वरूप किसानों के हित में बनी यह बहुप्रतीक्षित योजना फिलहाल शोभा की वस्तु बनकर रह गयी है.
भागलपुर व कहलगांव से मंगाई जाती है सब्जीयदि कोल्ड स्टोरेज समय पर चालू हो जाता, तो साहिबगंज के किसानों को अपनी उपज के भंडारण के लिए बाहरी जिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. वर्तमान स्थिति यह है कि सब्जियां बिहार के भागलपुर, कहलगांव, पीरपैंती और शिवनारायणपुर से मंगाई जाती हैं, जबकि फल पश्चिम बंगाल के कोलकाता और मालदा से आते हैं. बाहर से आयात के कारण बाजार में कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं और किसानों दोनों पर पड़ रहा है. गंगा तट के लगभग 78 किलोमीटर लंबे दियारा क्षेत्र में परवल, खीरा, ककड़ी, तरबूज और आम की भरपूर पैदावार होती है. कोल्ड स्टोरेज के संचालन से किसान अपनी उपज को सुरक्षित रखकर बेहतर दाम प्राप्त कर सकते थे. कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के निर्देशों के बावजूद सुस्ती बरकरार है. जिला सहकारिता पदाधिकारी महादेव मुर्मू ने कहा कि समस्या के समाधान के लिए प्रयास जारी हैं और जल्द ही संचालन शुरू किया जायेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
