साहिबगंज
क्या कहते हैं भू-वैज्ञानिक
आये दिन गंगा की गाय/राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन का मौत हो रही है. सुरक्षित के लिए डॉल्फिन सेंचुरी घोषित होना चाहिए. नदी संरक्षण सिर्फ पानी की गुणवत्ता का सवाल नहीं है. यह जैव-विविधता की सुरक्षा का पैमाना भी है. देश की पहली डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस तैयार हुई. गंगा बेसिन में संरक्षण जब नदी के जीव सुरक्षित होते हैं. नदी का भविष्य सुरक्षित होता है.
डॉ रणजीत कुमार सिंह, भू-वैज्ञानिक सह पर्यावरणविद
मृत डॉल्फिन का किया गया पोस्टमार्टम
तालझारी. मदनशाही सकरीगली के पास गंगा किनारे पर शुक्रवार को मृत डॉल्फन को डॉल्फिन वाचर ने गश्ती के दौरान देखा. सूचना वन क्षेत्र पदाधिकारी को दी गयी. सूचना मिलते ही वनरक्षी इंद्रजीत कुमार दास, वाचर राजेश ठाकुर, श्याम कुमार रविदास टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच कर छानबीन के बादमृत डॉल्फिन को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए वन कार्यालय तालझारी लाया गया, जहां वन कार्यालय परिसर के पास मृत डॉल्फिन का सीओ सह बीडीओ राम सुमन प्रसाद एवं वन क्षेत्र पदाधिकारी पंचम दुबे की उपस्थिति में तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक उधवा के भ्रमणशील पशु डाक्टर शिवेंद्र कुमार सिंह, तालझारी के डाॅ उमेश कुमार, बरहेट दीपक कुमार व बरहरवा के डॉ एहते सामुल ने पोस्टमार्टम किया. इसके बाद वन विभाग के पास अंतिम संस्कार किया. वन क्षेत्र पदाधिकारी पंचम दुबे ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया गया . मौके पर वाचर राजेश ठाकुर, श्याम कुमार रविदास, रमेश तुरी, उपेन तुरी आदि मौजूद थे.
गंगा में अब तक तीन डॉल्फिन मृत मिल चुके
साहिबगंज. मदनशाही गंगा घाट किनारे मृत डॉल्फिन बरामद किया गया है. गंगा की गाय कही जाने वाली डॉल्फिन का गंगा में यू मृत मिलना क्या कारण हो सकता है. ये स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बना है. वन विभाग की टीम इस बड़ी-सी मृत डॉल्फिन को अपने साथ तालझारी लेकर चली गयी. जिला के गंगा क्षेत्र में अब तक तीन डॉल्फिन मृत मिल चुका है. नया साल में पहला डॉल्फिन वो भी बड़ा डॉल्फिन मृत मिला है. शहर के ओझा टोली घाट से चानन, मादनशाही, सकरीगली गंगा घाट समेत विभिन्न क्षेत्रों में डॉल्फिन अटखेलिया खेलती गंगा में नंगे आंखों से नजर आती है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
