साहिबगंज से सुनील ठाकुर की रिपोर्ट
Sahibganj News: झारखंड के साहिबगंज में शनिवार सुबह उस समय लोगों की भीड़ जुट गई, जब नॉर्थ कॉलोनी स्थित बिजली कार्यालय के पास एक जंगली चीतल अचानक दिखाई दिया. शहर के बीचों-बीच पहली बार चीतल दिखने की खबर फैलते ही इलाके में हलचल मच गई. स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से चीतल की तस्वीरें और वीडियो भी रिकॉर्ड किए. शहर के रिहायशी इलाके में जंगली जानवर के पहुंचने से लोगों में उत्सुकता के साथ-साथ हैरानी भी देखने को मिली.
वन विभाग ने चलाया रेस्क्यू अभियान
स्थानीय लोगों की सूचना पर वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची. भीड़भाड़ वाले इलाके में चीतल काफी डरा-सहमा नजर आ रहा था और लगातार इधर-उधर भागने की कोशिश कर रहा था. वन विभाग की टीम ने काफी सतर्कता और सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया. काफी मशक्कत के बाद चीतल को सुरक्षित पकड़ लिया गया. अधिकारियों के अनुसार शहर क्षेत्र में पहली बार किसी जंगली चीतल का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया. वन विभाग का अनुमान है कि चीतल जंगल या आसपास के पहाड़ी इलाके से रास्ता भटककर शहर में पहुंच गया था.
डॉक्टरों ने किया पोस्टमार्टम
रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम चीतल को इलाज के लिए पशु चिकित्सकों के पास लेकर गई. हालांकि उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चीतल की मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम कराया गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी. रेंजर पंचम दुबे ने बताया कि भीड़ और डर के कारण चीतल काफी तनाव में आ गया था. प्राथमिक तौर पर माना जा रहा है कि घबराहट और अत्यधिक भय की वजह से उसकी मौत हुई हो सकती है. पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग परिसर में ही मृत चीतल को दफना दिया गया.
कई चिकित्सकों की टीम ने किया पोस्टमार्टम
मृत चीतल का पोस्टमार्टम पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा किया गया. इसमें डॉ. उमेश कुमार तालझारी, डॉ. शिवेंद्र प्रताप सिंह उधवा, मोहित कुमार कोटालपोखर और दीपक कुमार बरहेट शामिल थे. वन विभाग ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाएगी.
लोगों से वन विभाग की खास अपील
वन विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार का वन्यजीव रिहायशी इलाके में दिखाई दे, तो उसे पकड़ने, घेरने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें. अधिकारियों ने कहा कि कई बार भीड़ और शोरगुल के कारण वन्यजीव भयभीत होकर खुद को नुकसान पहुंचा लेते हैं या लोगों पर हमला भी कर सकते हैं. इसलिए ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना देना सबसे सुरक्षित तरीका है.
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प्रधान वनरक्षी के नेतृत्व में चला अभियान
यह रेस्क्यू अभियान प्रधान वनरक्षी अंकित झा के नेतृत्व में चलाया गया. अभियान में स्नेक रेस्क्यूर जितेंद्र हाजरी, ऋतिक कुमार, समाजसेवी अजय कुमार मलिक, अजय मल्लिक दहला, शिव कुमार हरिजन और शिव कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे. वन विभाग ने कहा कि भीड़भाड़ वाले इलाके में बिना किसी अप्रिय घटना के चीतल का सुरक्षित रेस्क्यू करना बड़ी उपलब्धि रही, हालांकि इलाज के दौरान उसकी मौत होना दुखद घटना है. इस घटना ने एक बार फिर जंगलों से सटे इलाकों में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण की जरूरत को उजागर किया है.
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