साहिबगंज. अंतरराष्ट्रीय भाषा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को झारखंड राजभाषा साहित्य अकादमी के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय भाषा दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. प्रगति भवन के सभागार में आयोजित संगोष्ठी का उदघाटन झारखंड राजभाषा साहित्य अकादमी के सचिव डॉ सच्चिदानंद ने किया. विशिष्ट अतिथि मनोरंजन भोजपुरी साहित्य परिषद की अध्यक्ष सरिता तिवारी थीं. शिक्षा और सतत विकास के लिए भाषा विषयक गोष्ठी का विषयवस्तु रखते हुए शोधार्थी अनुपमा शुक्ला ने कहा कि भाषाएं सतत विकास के लिए आवश्यक है. भाषाएं ज्ञान स्थानांतरण और संस्कृतियों के संरक्षण का प्राथमिक साधन है. यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा प्रणाली किसी भी मातृभाषा में सीखने के बेहतर परिणाम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है. मुख्य वक्ता सच्चिदानंद ने संबोधित करते हुए कहा कि भाषाएं ज्ञान के हस्तांतरण और संस्कृतियों के संरक्षण का प्राथमिक साधन हैं. आज दुनिया में लगभग 8,324 भाषाएं हैं, जिनमें से कई वैश्वीकरण और सामाजिक परिवर्तनों के कारण लुप्त होने के कगार पर हैं. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरिता तिवारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की 25वीं वर्षगांठ भाषाई विविधता को संरक्षित करने और मातृभाषाओं को बढ़ावा देने के प्रयासों की एक चौथाई सदी का जश्न है. एनआरपी विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज कुमार झा ने कहा कि मातृभाषा आदमी के संस्कारों की संवाहक है. कार्यक्रम को संताली भाषा साहित्य के विशेषज्ञ संपादक विमल मुर्मू ने संबोधित किया. वक्ताओं में श्वेता सुमन ने कहा कि वैश्वीकरण एवं अन्य कर्म से भाषाओं का विलुप्त हो जाना चिंता का विषय है. भाषाएं विलुप्त हो जाने से सभ्यता संस्कृति संस्कार पर व्यवहार के विलुप्त हो जाने का खतरा है. मौके पर उपेंद्र कुमार राय, खोखा यादव, संतोष चौधरी, शमशेर अली, अमृत प्रकाश मुख्य रूप से उपस्थित थे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
