साहिबगंज बरहरवा रेलवे स्टेशन पर 174 चोरी के मोबाइल फोन की बरामदगी और मालदा जिले के कालियाचक निवासी दो युवकों की गिरफ्तारी से साहिबगंज जिले के महाराजपुर और तीनपहाड़ क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. वर्षों से इन इलाकों का नाम चोरी के मोबाइल संग्रह और तस्करी नेटवर्क से जुड़ा रहा है. हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर इस संगठित काले कारोबार पर स्थायी रोक को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारों के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों में बड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक आयोजनों के दौरान होने वाली मोबाइल चोरी के बाद ये उपकरण साहिबगंज के इन क्षेत्रों तक पहुंचते हैं. यहां इन्हें इकट्ठा कर उनकी पहचान बदलकर पश्चिम बंगाल के कालियाचक समेत सीमावर्ती इलाकों के रास्ते बांग्लादेश और अन्य राज्यों में खपाने की कोशिश की जाती है.पुलिस की कार्रवाई में 174 मोबाइल बरामद होना इस बात का संकेत है कि यह नेटवर्क अभी भी सक्रिय है. हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल बरामदगी या छोटी गिरफ्तारी से इस संगठित गिरोह पर पूरी तरह अंकुश संभव नहीं है. इसके लिए पूरे नेटवर्क के सरगनाओं और तस्करी श्रृंखला तक पहुंचना जरूरी है. सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार यह क्षेत्र तीन दशक से अधिक समय से इस कारण बदनाम रहा है, जिससे जिले की छवि प्रभावित होती है. वे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की भी मांग कर रहे हैं ताकि युवाओं को ऐसे अवैध धंधों से दूर रखा जा सके. पूर्व पुलिस अधीक्षक धनंजय सिंह ने इस नेटवर्क पर व्यापक अभियान की योजना बनाई थी, लेकिन तबादले के बाद यह आगे नहीं बढ़ सका. अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं. क्या कहते हैं एसडीपीओ निश्चित रूप से महाराजपुर और तीन पहाड़ मोबाइल चोरी के नाम पर बदनाम है. ऐसे मामले को पुलिस विभाग गंभीरता से लिया है. जिला प्रशासन के सहयोग से इस दाग को धोने का प्रयास किया जाएगा. विमलेश त्रिपाठी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजमहल
साहिबगंज में मोबाइल चोरी नेटवर्क फिर उजागर, पुराने सवाल फिर खड़े
महाराजपुर-तीनपहाड़ क्षेत्र पर फिर उठी तस्करी की परतें

साहिबगंज (फाइल फोटो)