साहिबगंज
विश्व तंबाकू निषेध दिवस हर साल 31 मई को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य लोगों को तंबाकू से दूरी बनाकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है. कोरोना जैसी बीमारियों के दौर में यह और भी जरूरी है कि हम अपने फेफड़ों की सुरक्षा करें. कई लोगों ने तंबाकू छोड़कर अपनी सेहत सुधारी और आर्थिक बचत भी की. प्रभात खबर ने ऐसे ही कुछ लोगों व संस्था से बातें की, जिन्होंने नशा को अलविदा कर दिया है या फिर इसके प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं और इससे उनके जीवन में आये बदलावों को भी उन्होंने साझा किया है.
गायत्री शक्तिपीठ के समन्वयक दस वर्षों से नशा मुक्ति की जगा रहे अलख साहिबगंज. चौधरी कॉलोनी स्थित गायत्री शक्तिपीठ के उपजोन समन्वयक वीरेंद्र कुमार चौधरी पिछले दस वर्षों से नशा उन्मूलन अभियान चला रहे हैं. पीली धोती-कुर्ता पहनकर और झोली में विचार क्रांति अभियान की पुस्तकें लेकर वे लोगों को जागरूक करते हैं. करीब 70 वर्षीय चौधरी का मानना है कि भौतिकता और मानसिक तनाव के कारण लोग नशे की ओर बढ़ते हैं. वे युवाओं में आत्मिक विश्वास जगाकर उन्हें तंबाकू त्याग के लिए प्रेरित करते हैं. गुरुदेव श्रीराम शर्मा की छोटी पुस्तकों के माध्यम से वे आत्म जागृति का संदेश देते हैं. अब तक वे सैकड़ों लोगों को प्यार और सम्मान देकर तंबाकू छोड़ने का संकल्प दिला चुके हैं और आगे भी इस अभियान को जारी रखने का संकल्प रखते हैं.तीन वर्षों से नशा उन्मूलन के प्रति जागरूक कर रहे महादेव
साहिबगंज. साहिबगंज जिले के मोती पहाड़ी गांव के 75 वर्षीय मायलाल साह और 62 वर्षीय महादेव पंडित, दोनों अखिल विश्व गायत्री परिवार के सक्रिय सदस्य हैं. पिछले तीन वर्षों से वे क्षेत्र में नशा उन्मूलन का संदेश फैला रहे हैं. मायलाल साह पहले स्वयं नशे के आदी थे, लेकिन गायत्री मंत्र की दीक्षा लेने के बाद उन्होंने नशा त्याग दिया. इससे उन्हें आर्थिक बचत और स्वास्थ्य लाभ मिला. अब वे दूसरों को भी नशा छोड़ने की प्रेरणा देते हैं. महादेव पंडित, जो शिक्षक सेवा से जुड़े रहे हैं, बताते हैं कि गायत्री महामंत्र से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और सुख-शांति मिलती है. वे लोगों से गायत्री की शरण में आने की अपील करते हैं.
नशे से बिगड़ी तबीयत, छोड़ने से जीवन में आया बदलाव: अनिल महतो
साहिबगंज. बरहरवा के रहने वाले अनिल महतो ने कहा कि पिछले कई वर्षों से नशा के आदि होने कारण मेरी तबीयत बहुत खराब हो गयी थी. जिस कारण अस्पताल में अपना इलाज कराया और अब अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे है. और नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर उन्होंने नशे से दूर रहने की सलाह दी है.शराब का सेवन करते थे छोड़ दिया: तीनकोडी बागती
पिछले कई वर्षों से शराब का सेवन करते थे. बरहरवा के रहने वाले तीनकोडी बागती ने कहा कि जिससे जितनी भी कमाई होती थी. उसमें आधा पैसा नशा में चला जाता था. अभी बंद कर दिया है. बरहरवा के गायत्री परिवार के परिजन गंगाधर शर्मा और संजय भगत ने गायत्री परिवार द्वारा चलाये जा रहे नशा उन्मूलन अभियान के तहत इन्हें नशा पान से दूर किया.
