साहिबगंज.साहिबगंज रेलवे स्टेशन से 76 मोबाइल बरामद होने के मामले में अब बरामदगी के स्थान को लेकर सवाल उठने लगे हैं. जीआरपी की प्राथमिकी में मोबाइलों की बरामदगी स्टेशन परिसर से सटे जंगल-झाड़ी से होने की बात कही गयी है, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों के दावे के अनुसार बुधवार सुबह प्लेटफार्म नंबर एक पर खड़ी फरक्का एक्सप्रेस के कोच के पास पुलिसकर्मियों के साथ दो संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिये थे. इस दौरान पुलिस जवानों के हाथ में बैग और झोला भी नजर आया, जिसमें मोबाइल होने की चर्चा है.
फरक्का एक्सप्रेस के कोच के पास दिखे दो लोग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब सात बजे प्लेटफार्म नंबर एक पर फरक्का एक्सप्रेस खड़ी थी. इसी दौरान बोगी नंबर एक-3 के बी-3 कोच के दरवाजे के पास दो पुलिस जवानों के साथ सफेद कपड़े में दो व्यक्ति दिखाई दिये.
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि पुलिस जवानों के हाथ में एक काले रंग का बैग और एक नीले रंग का झोला था. बताया जा रहा है कि इन्हीं सामानों में मोबाइल होने की चर्चा थी. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
प्राथमिकी में जंगल-झाड़ी से बरामदगी का उल्लेख
दूसरी ओर, जीआरपी की ओर से दर्ज प्राथमिकी में 76 मोबाइल की बरामदगी जंगल-झाड़ी से होने की बात कही गयी है. इसी वजह से अब बरामदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है.
सवाल यह है कि आखिर 76 मोबाइल जंगल-झाड़ी से बरामद किये गये थे या फिर फरक्का एक्सप्रेस के कोच के आसपास से. इस सवाल का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
सीसीटीवी फुटेज से खुल सकता है बरामदगी का राज
पूरे मामले में स्टेशन परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. यदि बुधवार सुबह की फुटेज की जांच की जाये तो यह स्पष्ट हो सकता है कि पुलिसकर्मी किन लोगों के साथ प्लेटफार्म पर मौजूद थे और उनके हाथ में क्या सामान था.
आरपीएफ भी स्टेशन परिसर की सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है. जीआरपी की जांच में भी फुटेज अहम साक्ष्य बन सकती है. फुटेज से बरामदगी के वास्तविक स्थान और घटनाक्रम की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है.
7.60 लाख रुपये के मोबाइल, जांच जारी
जीआरपी ने मामले में कांड संख्या 25/26 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बरामद 76 मोबाइल की कुल कीमत करीब 7.60 लाख रुपये बतायी गयी है.
अब जांच एजेंसियों के सामने बरामद मोबाइलों के स्रोत, उनके मालिकों और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने की चुनौती है. साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि मोबाइल वास्तव में किस स्थान से बरामद किये गये थे. सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है.
