तालझारी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग नहीं हो सकी पूरी

2025 में भी लोगों का सपना टूटा, वर्षों से चल रहा संघर्ष

तालझारी

तालझारी प्रखंड क्षेत्र समेत आसपास के हजारों लोगों के लिए वर्ष 2025 में भी तालझारी रेलवे स्टेशन पर किसी भी एक्सप्रेस ट्रेन के ठहराव का सपना अधूरा ही रह गया. वर्षों से लगातार आंदोलनों, धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन के बावजूद रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी है. ऐसे में यह सवाल लोगों के बीच बना हुआ है कि आखिर तालझारी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव कब होगा. विदित हो कि तालझारी विकास संघर्ष समिति, छात्र संगठनों और आसपास के ग्रामीणों द्वारा मालदा इंटरसिटी एक्सप्रेस, जमालपुर-मालदा इंटरसिटी एक्सप्रेस, वनांचल एक्सप्रेस तथा जमालपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के ठहराव की मांग को लेकर कई बार आंदोलन किया गया. इस दौरान धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम, अनशन और यहां तक कि आमरण अनशन भी किया गया. हर बार रेलवे के वरीय पदाधिकारियों द्वारा एक माह के भीतर मांगें पूरी करने का आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई परिणाम नहीं निकला. तालझारी एवं इसके आसपास के क्षेत्रों से सरकारी कार्य, व्यवसाय तथा शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए लोगों को रांची, भागलपुर और मालदा जाना पड़ता है. इसके लिए यात्रियों को मजबूरी में तीनपहाड़ या साहेबगंज जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है. तालझारी स्टेशन पर दूधकोल, बेलदारचक, लालमाटी, मखानी, मंगलहाट, कन्हैया स्थान और हाथीगढ़ समेत कई गांवों के लोग निर्भर हैं, जिन्हें एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव न होने से काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

कब-कब हुआ आंदोलन

17 से 23 अगस्त 2007 : पांच दिवसीय धरना प्रदर्शन

24 अगस्त 2007 : चक्का जाम, रेलवे अधिकारियों के आश्वासन पर आंदोलन समाप्त

25 से 27 जून 2010 : तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन

28 व 29 जून 2010 : दो दिवसीय अनशन

30 जून 2010 : आमरण अनशन, एक माह के आश्वासन पर समाप्त

11 अक्टूबर 2023 : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, तालझारी इकाई द्वारा मंडल रेलवे प्रबंधक, मालदा के नाम स्टेशन प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मालदा-जमालपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस के ठहराव की मांग की गयी.

पर्यटन व धार्मिक स्थलों के बावजूद उपेक्षा

तालझारी रेलवे स्टेशन से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर अंतरराष्ट्रीय इस्कॉन कन्हैया नाट्यशाला मंदिर स्थित है, जहां वर्षभर देश-विदेश से कृष्ण भक्त पहुंचते हैं. वहीं मंगलहाट में स्थित मुगलकालीन ऐतिहासिक जामा मस्जिद (बारहद्वारी) भी प्रमुख पर्यटन स्थल है. इसके अलावा क्षेत्र में कई अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं. इन स्थलों तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को साहेबगंज या तीनपहाड़ से वाहन या लोकल ट्रेन का सहारा लेना पड़ता है, जिससे पर्यटन की संभावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तालझारी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव शुरू किया जाये तो न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक, शैक्षणिक और पर्यटन विकास को भी गति मिलेगी. अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन जनता की वर्षों पुरानी इस मांग पर कब ध्यान देता है.

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Author: ABDHESH SINGH

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