सैलानियों का इंतजार कर रहे बरहरवा के प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट

सगे-संबंधियों व मित्रों के साथ गाजा-बाजा लेकर प्राकृतिक छटाओं का आनंद उठाने पहुंचते हैं लोग

बरहरवा

नववर्ष 2026 के आगमन में कुछ ही दिन शेष बचे हैं. लेकिन, लोग अभी से ही अपने पसंदीदा स्थानों में पिकनिक के लिये पहुंच रहे हैं. राजा दिग्घी, शुक्रवासिनी झील, सोमवार हाट, बिंदुवासिनी मंदिर की तलहटी आदि लोगों के फेवरेट स्पॉट हैं. जहां लोग अपने सगे-संबंधियों व मित्रों के साथ गाजा-बाजा लेकर प्राकृतिक छटाओं के मध्य वनभोज का लुत्फ उठाते हैं. साथ ही यहां मौजूद धार्मिक स्थलों में भगवान के चरणों में मत्था टेक आशीर्वाद लेते हैं.

बिंदुधाम शक्तिपीठ में सालों भर पर्यटकों और भक्तों का है आना-जाना

बरहरवा रेलवे स्टेशन से पश्चिम दिशा में महज दो किलोमीटर की दूर स्थित बिंदुधाम शक्तिपीठ में सालों भर पर्यटकों और भक्तों का आना-जाना लगा रहता है. यहां नववर्ष में लोग विशेष रूप से देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेने के साथ-साथ इसकी तलहटी पर वनभोज के लिये पहुंचते हैं. राज्य सरकार द्वारा पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बाद अब यहां पार्क का निर्माण भी कराया गया है. जहां बच्चों के मनोरंजन की व्यवस्थाएं की गयी है. नव वर्ष को लेकर मंदिर कमेटी की ओर से भोग आदि की व्यवस्था की जायेगी.

राजा दिग्घी तालाब स्थानीय लोगों के लिये है प्रमुख पिकनिक स्पॉट

बरहरवा रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर की दूर नगर पंचायत क्षेत्र के छोटा गढ़ग्राम मौजा में स्थित राजा दिग्घी तालाब पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय लोगों के लिये एक प्रमुख पिकनिक स्पॉट के रूप में उभरा है. तालाब के चारों और स्थित छोटे बड़े दर्जनों तालाब, कैनल का नाला और हरे भरे खेत-खलियान इस पिकनिक स्पॉट को और खास बनाते हैं. तालाब की ऐतिहासिकता पर गौर की जाये, तो यहां का पानी कभी सूखता नहीं है तथा लोग इसे डिस्टिल्ड वाटर की तरह मानते हैं और पेयजल के रूप में उपयोग में लाते हैं.

शुक्रवासिनी मंदिर में पूजा अर्चना करने सालों भर पहुंचते हैं लोग

बरहरवा प्रखंड क्षेत्र की सुदूर मिर्जापुर पंचायत में स्थित मां शुक्रवासिनी मंदिर भी सैलानियों के लिये एक प्रमुख केंद्र है. जहां सालों भर प्रखंड क्षेत्र के अलावे पश्चिम बंगाल के पर्यटक मां शुक्रवासिनी की पूजा-अर्चना करने आते हैं. नववर्ष पर यहां मंदिर के समीप स्थित झील के किनारे सैकड़ों लोग पिकनिक मनाने पहुंचते हैं. यहां की झील और उसका मनमोहक दृश्य दूर से ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. यहां लोग पूजा करने के बाद वनभोज का लुत्फ उठाते हैं तथा सामूहिक रूप से गीत-संगीत व नृत्य करते हैं.

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Published by: Abdhesh singh

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