बिना गुरु के 430 बच्चे, शिक्षा के सपनों पर सिस्टम की अनदेखी

मोहनपुर यूएमएस में छठी से आठवीं तक शिक्षक नहीं

उधवा

सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई जब बच्चों की पढ़ाई निगलने लगे, तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक कमी नहीं बल्कि समाज के भविष्य पर गहराता संकट बन जाती है. शिक्षकविहीन कक्षाओं में बैठने को मजबूर बच्चे न सिर्फ पाठ्यक्रम से दूर हो रहे हैं, बल्कि धीरे-धीरे अवसरों की दौड़ में पीछे छूटते जा रहे हैं. उधवा प्रखंड के मोहनपुर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय मोहनपुर इसका स्पष्ट उदाहरण है. यहां कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाई होती है, लेकिन कक्षा छह से आठ तक के लिए एक भी नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं है.

15 दिनों में एकमात्र शिक्षक का तबादला, अब पढ़ाई बाधित

विद्यालय में कक्षा 6 से 8 तक लगभग 430 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जो वर्तमान में बिना शिक्षक के पढ़ाई करने को विवश हैं. विद्यालय के प्रधानाध्यापक सह सचिव सुशील मरांडी के अनुसार, विभाग को आवेदन देने के बाद हाल ही में एक शिक्षक की प्रतिनियुक्ति की गई थी, लेकिन मात्र 15 दिनों के भीतर ही उनका स्थानांतरण दूसरे प्रखंड के विद्यालय में कर दिया गया. इसके बाद से इन कक्षाओं के लिए कोई शिक्षक नहीं बचा है.

बच्चों की उपस्थिति दर्ज करना भी चुनौती

स्थिति यह है कि 400 से अधिक बच्चों की उपस्थिति दर्ज करना, विषयवार पढ़ाई कराना और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करना लगभग असंभव हो गया है. फिलहाल प्रधानाध्यापक और अन्य शिक्षक अपने सीमित समय में वैकल्पिक रूप से बच्चों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है.

पांचवीं तक भी 200 बच्चों के लिए केवल चार शिक्षक

विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक 200 से अधिक छात्र-छात्राएं हैं और कुल मिलाकर कंप्यूटर शिक्षक सहित केवल चार शिक्षक कार्यरत हैं. इनमें से प्रधानाध्यापक को प्रशासनिक और कागजी कार्यों में अधिक समय देना पड़ता है, जबकि कंप्यूटर शिक्षक अपने विषय के साथ अन्य विषयों को भी संभालने की कोशिश करते हैं. इसके बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. यह स्थिति विभागीय संवेदनहीनता और योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी को उजागर करती है. लंबे समय से मांग के बाद शिक्षक की नियुक्ति और फिर त्वरित स्थानांतरण यह दर्शाता है कि बच्चों की शिक्षा प्राथमिकता में नहीं है. वर्तमान में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह अस्थायी और अनिश्चित व्यवस्था पर निर्भर है.

क्या कहते हैं प्रधानाध्यापक

प्रधानाध्यापक सुशील मरांडी ने विभाग से मांग की है कि कक्षा 6 से 8 तक के लिए जल्द से जल्द शिक्षक की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई नियमित और व्यवस्थित रूप से चल सके.

सुशील मरांडी, प्रधानाध्यापक

क्या कहते हैं अधिकारी

कक्षा 6 से कक्षा आठवीं तक के लिए शिक्षकों की कमी है.सरकार के दिशा – निर्देशो का पालन किया जा रहा है.

अटल बिहारी भगत, बीपीओ,उधवा

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By ABDHESH SINGH

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