बरहरवा/साहिबगंज
झारखंड के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पंचायत में चलने वाली मनरेगा योजनाओं में अब पुरुषों के मुकाबले आधी आबादी आगे निकल गयी है. पूरे झारखंड में 52% महिलाओं को मनरेगा में मजदूरी मिला है, तो वहीं पुरुषों को इससे कम 48% रोजगार मिला है. अगर बात करें वित्तीय वर्ष 2025-26 की, तो झारखंड में कुल 8,94,06,668 महिलाओं एवं पुरुषों को रोजगार उपलब्ध कराया गया हैं. जिनमें से महिलाएं 4,63,85,667 हैं, वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 10,09,40,056 महिलाओं एवं पुरुषों को रोजगार मिला हैं, जिनमें 4,95,34,708 महिलाओं को काम मिला है. ऐसे में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं झारखंड में मनरेगा योजनाओं में आगे हैं. पिछले वर्ष की तुलना में इस वित्तीय वर्ष में 3% की वृद्धि हुई है, पिछले वर्ष 49% रोजगार महिलाओं को मिला था, वहीं इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 52% तक पहुंच गया है. इससे झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में चलायी जा रही इन योजनाओं से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है. अगर पूरे झारखंड में जिलावार की बात की जाये तो सबसे अधिक पूर्वी सिंहभूम जिले में 59% महिलाओं तथा सबसे कम गुमला में 45% महिलाओं को रोजगार मिला है. वहीं, संताल परगना प्रमंडल में गोड्डा जिला 56% महिलाओं को काम दिलाने के साथ नंबर एक पर है, तो देवघर जिला 49% के साथ सबसे पीछे है.
महिलाओं के लिये कारगर बनी दीदी-बाड़ी योजना मनरेगा योजना अंतर्गत ऐसे तो कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन दीदी-बाड़ी योजना में महिलाएं सबसे अधिक रूचि दिखा रही है. इसमें महिलाएं अपनी बाड़ी में मौसमानुसार हरी सब्जियां लगाती हैं तथा उसे स्थानीय बाजारों में बिक्री कर अपनी पूंजी बना रही है. इसके अलावे झारखंड सरकार महत्वाकांक्षी योजना बिरसा हरित ग्राम योजना के काम में भी महिलाएं आगे है. मनरेगा में काम करने वाली पतना प्रखंड की मजदूर आशा देवी ने बताया कि उन्होंने दीदी-बाड़ी योजना के तहत अपनी बाड़ी में सब्जी की खेती की. तथा उस सब्जी को स्थानीय बाजार बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया. और, वह उससे अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्चा निकालने के साथ-साथ पति की भी मदद करती हैं. मनरेगा में काम करने वाली अन्य महिलाएं भी दीदी-बाड़ी योजना का लाभ ले रही हैं और महिला सशक्तीकरण के सरकार के प्रयास को सफल बना रही है. क्या कहते हैं मनरेगा आयुक्त झारखंड में मनरेगा मजदूरी करने में महिलाएं पुरुषों के मुकाबला आगे हैं. हम लोग महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिये लगातार काम कर रहे हैं. कई योजनाएं में धरातल पर काफी बेहतर काम हो रहा है. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना हमारा उद्देश्य है. झारखंड इस ओर अग्रसर है. मनरेगा योजना की समीक्षा हर महीने की जाती है और इसके क्रियान्वयन के लिये बेहतर प्लान तैयार किया जाता है. जिलावार मनरेगा योजना में महिलाओं की भागीदारी जिला का नाम महिलाओं की संख्या पूर्वी सिंहभूम 13,30,115 बोकारो 17,72,842 हजारीबाग 29,80,750 गोड्डा 17,79,421 गिरीडीह 47,21,334 कोडरमा 9,94,961 रामगढ़ 12,17,944 पाकुड़ 14,27,772 धनबाद 12,77,036 चतरा 23,29,457 जामताड़ा 28,69,041 लोहरदगा 6,89,052 साहिबगंज 12,94,291 स. खरसावां 13,02,318 रांची 18,00,395 लातेहार 27,10,485 खूंटी 7,60,400 दुमका 25,25,634 पलामू 25,22,196 देवघर 28,80,084 पश्चिमी सिंहभूम 16,99,924 सिमडेगा 13,97,784 गढ़वा 28,63,972 गुमला 12,38,458डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
