साहिबगंज जिले के उधवा प्रखंड अंतर्गत पूर्वी प्राणपुर पंचायत में निर्माणाधीन गंगा कटाव निरोधक योजना का एक हिस्सा शुक्रवार को गंगा नदी में ध्वस्त हो गया. करोड़ों रुपये की लागत से चल रही इस योजना के बॉक्स संख्या-7 का निचला हिस्सा ढहकर नदी में समा गया. घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. लोगों ने निर्माण कार्य में अनियमितता, घटिया गुणवत्ता और विभागीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर अभी सामान्य रूप से ही बढ़ा है और बाढ़ की स्थिति भी नहीं बनी है. इसके बावजूद कटाव निरोधक संरचना का ढह जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. उनका आरोप है कि यदि जलस्तर में मामूली वृद्धि भी यह संरचना नहीं झेल सकी, तो बाढ़ और तेज कटाव के समय इसकी स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है.
7.54 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा है कार्य
जानकारी के अनुसार, जल संसाधन विभाग द्वारा 7.54 करोड़ रुपये की लागत से गंगा नदी के तट पर पूर्वी प्राणपुर पंचायत के शांति मोड़ सीमा से श्रीधर पंचायत के साहेब टोला तक कटाव निरोधक कार्य कराया जा रहा है. पिछले कुछ दिनों से हुई बारिश के कारण गंगा के जलस्तर में हल्की वृद्धि हुई है. हालांकि अब तक आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है. बारिश के बाद फिलहाल निर्माण कार्य भी बंद है. इसी दौरान शुक्रवार को निर्माणाधीन बॉक्स संख्या-7 का निचला हिस्सा ढहकर गंगा में गिर गया, जिससे पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं.
ग्रामीणों में दहशत, विस्थापन की बढ़ी आशंका
साहेब टोला गांव के गंगा तट पर रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि कटाव निरोधक संरचना के क्षतिग्रस्त होने से उनके बीच भय का माहौल है. ग्रामीण आताउर शेख, बेलाल शेख, दुलाल शेख, माला शेख, इमाम शेख, राजू शेख, खुर्शीद शेख, तोहर शेख, मंटू शेख, अंसारुल शेख, मकाउर शेख, मंसूर शेख और एनामुल शेख सहित अन्य लोगों ने कहा कि उनके घर गंगा किनारे स्थित हैं और यदि इस वर्ष कटाव तेज हुआ तो उन्हें अपना आशियाना छोड़कर विस्थापित होना पड़ सकता है. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में अनियमितता और घटिया सामग्री के उपयोग के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. उनका कहना है कि जिस बोल्डर क्रेटिंग पर गंगा कटाव रोकने की उम्मीद थी, वह नदी का शुरुआती दबाव भी नहीं झेल सकी. उन्होंने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और संवेदक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि निर्माण कार्य टिकाऊ नहीं है, तो यह सरकारी धन की बर्बादी के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है. यह पहली बार नहीं है जब इस परियोजना में इस तरह की घटना हुई है. 28 जुलाई 2025 को बॉक्स संख्या-2 का अगला हिस्सा गंगा में ढह गया था. 8 अगस्त 2026 को बॉक्स संख्या-3 का अगला हिस्सा भी नदी में ध्वस्त हो गया था. लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से ग्रामीणों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर नाराजगी और चिंता व्याप्त है. यह कार्य स्वीकृत ड्राइंग एवं तकनीकी डिजाइन के अनुरूप कराया गया है. इसका उद्देश्य गंगा नदी के कटाव को रोकना नहीं, बल्कि नदी के बहाव की दिशा को नियंत्रित करना है. बोल्डर के सामने का हिस्सा नदी की धारा के प्रभाव से कट सकता है, जिसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. चूंकि कार्य जमीन की सतह से किया जाता है, इसलिए यदि नदी में नीचे की ओर कटाव होता है, तो ऐसी स्थिति में संरचना के धंसने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है. -प्रेम कुमार सोरेन, कार्यपालक अभियंता, गंगा पंप नहर
