प्रतिनिधि, राजमहल: गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब राजमहल शहर के मधुसूदन कॉलोनी स्थित वार्ड नंबर छह के श्मशान घाट पर भी दिखने लगा है. श्मशान घाट परिसर में बाढ़ का पानी घुस जाने से शवों के अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित स्थान पूरी तरह जलमग्न हो गया है. ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले परिजनों के सामने गंभीर परेशानी खड़ी हो गई है.
अंतिम संस्कार की जगह पानी में डूबी
श्मशान घाट का अधिकांश हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब चुका है. पानी भर जाने के कारण लकड़ी रखने, शव रखने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने में लोगों को काफी परेशानी हो रही है.
स्थानीय लोगों के अनुसार गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. यदि जलस्तर में और वृद्धि हुई, तो घाट का बचा हुआ हिस्सा भी पानी में डूब सकता है. ऐसी स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए जगह का संकट और गंभीर हो सकता है.
तीन जिलों से पहुंचते हैं लोग
राजमहल का यह श्मशान घाट केवल शहर के लोगों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आसपास के कई इलाकों के लोग भी यहां अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं.
स्थानीय लोगों के मुताबिक साहिबगंज, गोड्डा और दुमका जिले के अलावा राजमहल तथा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग शव लेकर यहां पहुंचते हैं. यहां प्रतिदिन औसतन पांच से छह शवों का अंतिम संस्कार किए जाने की बात स्थानीय लोगों ने बताई.
बढ़ते पानी से परिजनों की बढ़ी चिंता
बाढ़ का पानी श्मशान घाट तक पहुंचने से अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. पानी के बीच शव और अंतिम संस्कार की सामग्री घाट तक पहुंचाना भी चुनौती बन गया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई और गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से श्मशान घाट की स्थिति का तत्काल जायजा लेने की मांग की है. लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक प्रक्रिया के लिए वैकल्पिक स्थान या अन्य जरूरी व्यवस्था तत्काल उपलब्ध कराई जानी चाहिए.
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के मुताबिक तीन जिलों से लोग इस घाट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं, इसलिए बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को इसे गंभीरता से लेते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाना चाहिए.
