बदहाल होता बिंदुधाम मेला, पारदर्शिता के अभाव में घट रही पहचान पतना. बरहरवा के सुप्रसिद्ध बिंदुधाम मंदिर में चैत्र नवरात्र के अवसर पर लगने वाला एक माह का ऐतिहासिक मेला शहरीकरण और बढ़ती जनसंख्या के कारण पहले ही सिकुड़ चुका है. वहीं दूरदर्शी मेला कमेटी के अभाव और मनमानी के कारण मेला अपनी साख भी खोता जा रहा है. आलम यह है कि कमेटी ने लगातार दूसरे वर्ष प्रशासन के लिखित आदेश के बावजूद मेले का आय-व्यय ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है, जबकि मेला शुरू होने से पहले ही पतना अंचलाधिकारी द्वारा मेला कमेटी को नोटिस (ज्ञापन संख्या-93) जारी कर वर्ष 2025 के मेले का संपूर्ण आय-व्यय हिसाब सार्वजनिक करने को कहा गया था. लेकिन कमेटी ने नोटिस को नजरअंदाज करते हुए बिना हिसाब दिये ही फिर से मेले का संचालन शुरू कर दिया. हैरानी की बात यह है कि इस वर्ष का मेला समाप्त हुए भी एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन न तो पिछले साल का हिसाब दिया गया और न ही इस साल का. लगातार दूसरे वर्ष जनसहयोग से जुटायी गयी राशि का कोई लेखा-जोखा जनता के सामने नहीं रखा गया, जबकि जनसहयोग से आयोजित कार्यक्रमों में पारदर्शिता आवश्यक मानी जाती है. कभी लाखों की भीड़ और चंदे से गुलजार रहने वाला यह मेला अब जनसहयोग के अभाव में दम तोड़ता नजर आ रहा है. कमेटी सदस्यों में आपसी समन्वय नहीं अंचलाधिकारी द्वारा कमेटी को दिये गये नोटिस के अनुसार मेला प्रभारी विशाल दास ने भी आवेदन देकर बताया कि बार-बार मांगने के बावजूद कोषाध्यक्ष जय सोरेन द्वारा हिसाब उपलब्ध नहीं कराया गया. इससे यह स्पष्ट होता है कि कोषाध्यक्ष मेला प्रभारी के निर्देशों का भी पालन नहीं कर रहा है. आय-व्यय का हिसाब सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है. बरहरवा का मेला क्षेत्र का सुप्रसिद्ध मेला माना जाता है. एक माह तक चलने वाले इस मेले में लाखों रुपये चंदे के रूप में जुटाये जाते हैं. ऐसे में मेला कमेटी द्वारा हिसाब सार्वजनिक नहीं करना कई सवाल खड़े कर रहा है. सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि पतना अंचलाधिकारी के लिखित नोटिस के बाद भी कमेटी ने उसकी अवहेलना की और प्रशासन ने भी आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. नोटिस जारी करने के बाद प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है. समाजसेवियों व बुद्धिजीवियों को आगे आने की जरूरत ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 15-20 वर्ष पूर्व तक बिंदुधाम मेला पूरे संथाल परगना क्षेत्र का प्रसिद्ध मेला हुआ करता था. झारखंड, बिहार और बंगाल समेत अन्य राज्यों से भी यहां बड़ी संख्या में लोग मेला देखने पहुंचते थे. उस समय मेले के लिये पर्याप्त जगह भी उपलब्ध थी. लेकिन बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण मेला सिकुड़ता चला गया. वहीं मेला कमेटी की मनमानी और लापरवाही के कारण अब यह मेला खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि दूरदर्शी मेला कमेटी होती तो प्रशासन के सहयोग से मेले को पुनर्जीवित करने के लिये बेहतर विकल्प तलाशे जा सकते थे. प्रशासनिक स्तर पर भी नोटिस के बाद कोई फॉलोअप नहीं होना सवाल खड़े करता है. पहले भी खबर छपने पर हुई थी कार्रवाई गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रभात खबर द्वारा मेले में दुकानदारों की ओर से मनमाना शुल्क वसूलने और मेला परिसर का कचरा स्कूल के सामने फेंकने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गयी थी. खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया था और स्कूल के सामने से कचरा हटवाया गया था. साथ ही दुकानदारों द्वारा वसूले जा रहे रेट में भी कुछ कमी की गई थी. हालांकि आय-व्यय के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. क्या कहते हैं एसडीओ बिंदुवासिनी मेला कमेटी को हिसाब जमा करने के लिए नोटिस दिया गया है. यदि कमेटी हिसाब जमा नहीं करेगी तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. सदानंद महतो, एसडीओ, राजमहल
नोटिस के बावजूद मेला कमेटी ने नहीं दिया ब्योरा
बिंदुधाम मेले का हिसाब अब तक सार्वजनिक नहीं, कमेटी पर उठे सवाल

साहिबगंज (फाइल फोटो)