साहिबगंज से इमरान की रिपोर्ट
BPSC Exam 2026, साहिबगंज : करत करत अभ्यास ते जड़मति होत सुजान रसरी आवत जात ते सिल पर परत निशान इस कहावत को अक्षरशः सच कर दिखाया है एक बेहद साधारण परिवार के होनहार लाल ने. साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित जैप-09 (JAP-09) रोड पर पिछले सात-आठ वर्षों से किराये के एक छोटे से मकान में रह रहे सौरभ कुमार अकेला ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है. सौरभ का चयन ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर यानी बीडीओ (BDO) के पद पर हुआ है. मूल रूप से बिहार के कटिहार जिले के बरारी प्रखंड अंतर्गत मोहना चांदपुर गांव के रहने वाले सौरभ की इस ऐतिहासिक सफलता ने कटिहार के साथ-साथ साहिबगंज जिले का नाम भी पूरे प्रदेश में रोशन किया है.
बेटे की पढ़ाई में पिता ने नहीं आने दी कोई कमी
सौरभ की यह सफलता इसलिए भी बेहद खास और मिसाल देने योग्य है, क्योंकि इसके पीछे उनके माता-पिता का खून-पसीना और बेइंतहा संघर्ष छुपा है. सौरभ के पिता श्रीकांत मिश्रा और माता पूनम मिश्रा साहिबगंज में जैप-09 के समीप उद्योग विभाग के ठीक सामने एक छोटी-सी झोपड़ीनुमा दुकान में चाय बेचने का काम करते हैं. इसी चाय की दुकान से होने वाली बेहद मामूली और सीमित आय के जरिए वे अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं. घर की माली हालत बेहद खराब होने के बावजूद इस स्वाभिमानी माता-पिता ने अपने बेटे की उच्च शिक्षा की राह में कभी भी कंगाली या तंगहाली को आड़े नहीं आने दिया. उन्होंने खुद भूखे रहकर भी बेटे की पढ़ाई के लिए संसाधन जुटाए और आज उनकी इसी तपस्या और त्याग का परिणाम सौरभ की शानदार कामयाबी के रूप में सबके सामने है.
सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर
सौरभ के पिता श्रीकांत मिश्रा ने गर्व से भरे आंसुओं के साथ बताया कि उनके बेटे की प्रारंभिक (शुरुआती) शिक्षा गांव के ही एक साधारण सरकारी विद्यालय से हुई थी. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने डीएस कॉलेज, कटिहार से इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा पास की. इंटर के बाद उच्च शिक्षा के लिए सौरभ पटना चले गए, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित बीएन कॉलेज (BN College, Patna) से स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की. वर्तमान में वह पटना कॉलेज से एलएलबी (LLB) की पढ़ाई कर रहे थे. वकालत की पढ़ाई करने के साथ-साथ उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करने का जज्बा था. इसी सोच के साथ उन्होंने बिना किसी महंगे कोचिंग के बीपीएससी (BPSC) की तैयारी जारी रखी. अपनी अद्भुत एकाग्रता और कड़ी मेहनत के बल पर सौरभ ने अपने पहले ही प्रयास (First Attempt) में इस कठिन परीक्षा को क्रैक कर बीडीओ का पद हासिल कर लिया.
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सफलता का श्रेय परिवार और गुरुओं को
अपनी इस शानदार और गौरवमयी सफलता पर नवनियुक्त बीडीओ सौरभ कुमार अकेला ने बेहद शालीनता से इसका पूरा श्रेय अपने पूजनीय माता-पिता, अपनी इकलौती बहन, पूरे परिवार, अपने शिक्षकों और सच्चे मित्रों को दिया है. सौरभ ने भावुक होते हुए कहा, “आज मैं जो कुछ भी हूं, अपने माता-पिता के संघर्षों की बदौलत हूं. विपरीत परिस्थितियों में भी मेरे प्रति उनके अटूट विश्वास और हौसले ने मुझे कभी टूटने नहीं दिया और हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.” सौरभ की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही साहिबगंज और कटिहार पहुंची, दोनों ही जगहों पर खुशी का माहौल छा गया. झोपड़ी वाली चाय की दुकान पर बधाई देने वालों और मिठाई खिलाने वाले स्थानीय लोगों का तांता लगा हुआ है. हर कोई इस होनहार अधिकारी को उसके उज्ज्वल और स्वर्णिम भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं और आशीर्वाद दे रहा है.
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