गंगोत्री से सुरक्षित लौटे सुरेंद्र

राजमहल : उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा से बच कर लौटे तालझारी के सुरेंद्र कुमार आज इस घटना को याद करने पर सिहर जाते हैं. चार धाम की यात्रा पर गये सुरेंद्र गंगोत्री में जिस होटल में ठहरे थे, उसे कुदरत के कहर ने लील लिया. उनके दोस्त चार दिन तक भूखे-प्यासे रहे थे. रविवार को […]

राजमहल : उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा से बच कर लौटे तालझारी के सुरेंद्र कुमार आज इस घटना को याद करने पर सिहर जाते हैं. चार धाम की यात्रा पर गये सुरेंद्र गंगोत्री में जिस होटल में ठहरे थे, उसे कुदरत के कहर ने लील लिया. उनके दोस्त चार दिन तक भूखे-प्यासे रहे थे.

रविवार को घर वापस लौटे सुरेंद्र ने प्रभात खबर से अपनी भयावह यादें बांटी. साहिबगंज रेलवे अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मी सुरेंद्र अपने चार साथियों प्रेम मंडल, संजय महतो, वीरेंद्र यादव, निरंजन दे, विनोद कुमार व रवींद्र यादव के साथ चार धाम की तीर्थ यात्रा पर 10 जून को साहिबगंज से चले थे. उन्होंने बताया कि 14 जून की रात को गंगोत्री में वे होटल अन्नपुर्णा में रुके थे.

15 जून की सुबह श्री कुमार की तबीयत बिगड़ गयी. उस दिन काफी बारिश हो रही थी. उन्होंने वापस घर वापस आने का मन बना लिया. गंगोत्री में सुबह पूजा-अर्चना की तथा उत्तर काशी के लिए रवाना हो गये. लगभग 165 किमी की दुरी तय कर श्री कु मार उत्तरकाशी पहुंचे. वहां वे होटल सेखावत में ठहरे. उनके सभी साथी केदारनाथ के लिए भाड़े के वाहन से निकल गये.

इस दिन रात करीब 10 बजे बारिश और तेज हो गयी. उनके साथियों ने बताया कि वे गंगोत्री से 50 किलोमीटर दुर फंसे हैं. सड़क पूरा जाम है. श्री कुमार ने सभी को वापस आने की सलाह दी. सुरेंद्र ने बताया कि उनके दोस्त भूखे-प्यासे चार दिनों तक गाड़ी में ही रूके रहे. दोस्तों को वापस गंगोत्री पहुंचने में चार दिन का समय लग गया. जब गंगोत्री पंहुचे, तो पाया कि जिस होटल में रुके थे, उसे कुदरत ने लील लिया है. गंगोत्री से बाकी साथी 20 जून को हरिद्वार पहुंचे. फिर सभी एक साथ घर वापस लौटे.

मचा था त्रहिमाम

श्री कुमार ने कहा कि जिस होटल में वे रूके थे, उस दिन पांच सौ रुपया में कमरा बुक किया था. घटना के बाद प्रतिदिन कमरे का किराया बढ़ता गया. उत्तरकाशी में अचानक पीड़ित श्रद्धालुओं की भीड़ देख होटलों का किराया एक हजार रुपये से अधिक कर दिया गया. प्रशासन की सख्ती के बाद होटलों का किराया घटाया गया.

सरकारी स्तर पर किसी प्रकार का व्यवस्था नहीं थी. इससे स्थिति काफी भयावह थी. लोग भूख से तड़प रहे थे. पानी के लिए त्रहिमाम मचा था. रविवार को घर पहुंचने पर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गयी. बड़ा भाई योगेंद्र कुमार ने बताया कि भगवान का शुक्र है कि उनके भाई अपने साथियों के साथ सुरक्षित घर लौट आये.
– अभिजीत रक्षित –

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