उधवा : एक तरफ हमारी जीवन पद्धति आधुनिक होती जा रही है आज पूरे देश में साधारण से साधारण परिवार के लोग भी इंटरनेट से जुड़ गये हैं. हमारा देश डिजिटल हो रहा है, लेकिन इलाज के अभाव में किसी व्यक्ति की मौत हो जाना हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था के पोल खोल रही है.
ढाई लाख की आबादी में एक भी सरकारी अस्पताल का ना होना क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के सच्चाई को उजागर करती है.
सरकार के लाखों खर्च होने के बावजूद उधवा प्रखंड में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में समुचित व्यवस्था नहीं है. उधवा प्रखंड के 26 पंचायतों की कुल आबादी ढाई लाख से अधिक है, लेकिन क्षेत्र में मात्र दो पीएचसी संचालित हैं. जिसमें प्रसव के अलावा कोई सुविधा नहीं है.
दवा छोड़िए डॉक्टर साहब तो उधवा में रहते ही नहीं. इस कारण लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों पर आश्रित रहना पड़ता है. उधवा प्रखंड के राधानगर गांव में रहने वाले बलराम घोष (70 वर्ष) कुछ दिनों से बुखार से पीड़ित थे. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण वृद्ध का इलाज गांव के ही झोलाछाप डॉक्टर से कराया जा रहा था. शनिवार को मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ गयी. इसके बाद कुछ ग्रामीणों के सहयोग से इलाज के लिए मालदा ले जाया जा रहा था. इसी क्रम में मरीज की मौत हो गयी.
मरीज में पाये गये डेंगू जैसे लक्षण
राधानगर गांव के बलराम घोष की पत्नी भदीया बेवा, पुत्र अजित घोष, रीता देवी, टोनी घोष, संध्या घोष के अनुसार मृतक में डेंगू जैसे लक्षण थे. आर्थिक स्थिति ठीक ना रहने के कारण इलाज के लिए मालदा ले जाने में विलंब हुआ. गांव के लोगों ने सहायता कर मालदा ले जाने का प्रबंध किया, लेकिन तब तक देर हो गयी थी.
एक दर्जन से अधिक लोगों में पाये गये लक्षण
प्रखंड क्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक लोग डेंगू के शिकार हुए हैं जिनका इलाज पश्चिम बंगाल के विभिन्न अस्पतालों में कराया गया है.
अबतक कटहलबाड़ी जयंतीग्राम निवासी नवीजान अंसारी उधवा के अंसारुल हक सुरेता बीबी ईश्वर मंडल संजीव मंडल मनोज सरकार, चतुर्भुज राय, फुदकीपुर बंगालीपाड़ा के छोटू दास, आतापुर पंचायत के पारोमति कुमारी, साहेबनगर गांव के राज मंडल, विक्की प्रमाणिक, माम्पी प्रमाणिक, रायबती देवी, आदर्श प्रमाणिक, मसना गांव के डब्लू शेख, बकायटोला के सलीम शेख के अलावा कई अन्य लोगों में डेंगू के लक्षण पाये गये हैं. सभी का इलाज पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में कराया गया.
