ग्रामसभा दिवस. आदिवासी समुदाय के लोगों ने निकाली रैली, एसएसएसएस प्रवक्ता ने कहा
बीडीओ को सौंपा चार सूत्री मांग पत्र
बोरियो : सोना संताल समाज समिति व मांझी परगना सरदार संघ के संयुक्त बैनर तले ग्रामसभा दिवस पर मंगलवार को मोरंग नदी पुल से सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों ने रैली निकाली. जो शहर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण कर प्रखंड मुख्यालय पहुंच कर सभा में तब्दील हो गयी. कार्यक्रम का विधिवत उदघाटन मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान हांदो मुर्मू ने कार्यक्रम स्थल पर सरजोम पौधा का पूजन कर किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य प्रवक्ता जोसेफ सोरेन ने कहा कि आदिवासी समुदाय की सुरक्षा और संरक्षण के लिये कई सारे संवैधानिक कानून व प्रावधानों के बावजूद समाज पर अत्याचार, शोषण व विस्थापन जारी है.
राज्य अलग होने के 16 वर्ष गुजरने के बाद भी झारखंड के मूलवासी आदिवासी अपने हक व अधिकार से वंचित हैं. सूबे की भाजपा सरकार के कार्यकलापों से साबित हो रहा कि ये सरकार आदिवासी विरोधी है. आज जिले में चुपके से आदिवासियों को विस्थापित करने की साजिश चल रही है. जिसे आदिवासी समाज पूरा नहीं होने देगा. सामाजिक कार्यकर्ता पौलूस मुर्मू ने धर्म स्वतंत्र विधेयक, भूमि बैक, भूमि अधिग्रहण बिल व वर्तमान समय में आदिवासी समाज की स्थिति पर लोगों को विस्तृत जानकारी उी. मौके पर प्रधान अनपा किस्कू, ताला हांसदा, खुदू मुर्मू, वीरेंद्र मुर्मू, सूना हांसदा, जोसेफ हासंदा, पकु टुडू, फादर टॉम, सुकरमुनि, बोका मुंडा, विजय बास्की, सहदेव उरांव, रतिलाल हांसदा, लखन सोरेन, रॉबर्ट सोरेन, बोबे पहाडिया सहित अन्य उपस्थित थे.
ये हैं मांगें
विस्थापित बंद हो
संताल परगना कस्तकारी अधिनियम 1949 व पेशा कानून 1996
कड़ाई से लागू हो
आदिवासियों की हड़पी गयी जमीनें रैयत को वापस मिले
