उदासीनता. कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा आदिवासी छात्रावास
साहिबगंज : जिला कल्याण विभाग ने जिला मुख्यालय नगर भवन के निकट आदिवासी छात्रावास में सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है. छात्रावास में कई बुनियादी समस्याएं हैं. उपराजधानी दुमका के आदिवासी छात्रावास में छात्रा से गैंगरेप होने के बाद भी विभाग सजग नहीं दिख रहा है. राज्य के पिछड़ा जिला साहिबगंज में भी छात्राओं के साथ कोई अनहोनी ना हो.
इसके प्रति प्रशासन भी गंभीर नहीं है. इस मामले को लेकर जब प्रभात खबर प्रतिनिधि छात्रावास के सचिव सुशीला मुर्मू से मिला तो वह भी काफी निश्चिंत नजर आयी. सुरक्षा के सवाल पर बताया कि अभी हमलोग जरूर गांव से शहर पढ़ने के लिए आये हैं.पर बड़े शहरों में बड़ी घटना हो सकती है. तो यह तो छोटो शहर है. कमी भी हो सकता है . हम लोग भी काफी डरी-सहमी रहती हूंं. जिला मुख्यालय ने संचालित आदिवासी छात्रावास में की सुरक्षा की दृष्टीकोण से सीसीटीवी कैमरा से निगरानी रखी जा सकती थी. पर छात्रावास में कैमरा मौजूद नहीं है.
50 बेड पर 200 छात्राएं करती है पढ़ाई
नगर भवन के निकट जिला कल्याण विभाग द्वारा बनाया गया 50 बेड का छात्रावास में 200 छात्राएं रह कर पढ़ाई कर रही है. इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्राएं कितनी मुश्किलों से छात्रावास में रहती है. पिछले वर्ष छात्रावास का निरीक्षण महिला आयोग की महुआ मंझी के नेतृत्व में कमेटी सदस्यों ने किया था. छात्रावास की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया गया था. बावजूद इसके पदाधिकारी फंड की कमी का रोना रो रहे हैं.
कहते हैं एसपी
आदिवासी छात्रावास को लेकर पुलिस प्रशासन मुस्तैद है. पुलिस बलों की तैनाती हो गयी और समय-समय जांच अभियान भी चलाया जायेगा.
पी मुरूगन, एसपी
कहते हैं जिला कल्याण पदाधिकारी
50 बेड के छात्रावास में अधिक छात्राएं रह रही है . छात्रावास की समस्या को लेकर सरकार को लिखा गया है. वार्डन के मामले 24 गुणा 7 के पैटर्न पर तैनाती करने का प्रयास किया जायेगा. -उत्तम भगत
