दुर्गोत्सव . साहिबगंज व पाकुड़ िजले में दुर्गापूजा की तैयारी अंतिम चरण में
साहिबगंज/मंडरो/बोरियो : नवरात्रि के तीसरे दिन शनिवार को मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा की गयी. पंडित जगदीश प्रसाद शर्मा ने बताया कि देवी का यह रूप साक्षात महाकाली की है. और उन्हीं के उग्र और सौम्य दो रूपों में अनेक रूप धारण करने वाली ये दस महाविद्याएं हैं. महाकाली के दधधा प्रधान रूपों को ही दस महाविद्या कहा जाता है. सवंविद्यापति शिव की शक्तियां ये 10 महाविद्याएं लोक और शास्त्र में अनेक रूपों में पूजित हुई, पर उनके दस रूप प्रमुख हो गये. वे ही महाविद्याएं साधको की परम धन है जो सिद्ध होकर अनंत सिद्धियां और अनंत सिद्धियां और अनंत का साक्षत्कार कराने में समर्थ है.
सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा सुन कर पूजा-अर्चना की. शहर के तालबन्ना, बनिया पट्टी दहला, चौंक बाजार, बंगाली टोला, नॉर्थ कॉलोनी, कुलीपाड़ा, पुरानी साहिबगंज, साक्षरता चौक, जिरवाबाड़ी थाना, सुभाष कॉलोनी, झरना कॉलोनी, साउथ कॉलोनी, गोड़ाबाड़ी हाट में स्थापित प्रतिमा स्थल के अलावा कई घरों में पूजा की गयी. बोरियो में पुरानी दुर्गा मंदिर व तेली टोला स्थित दुर्गा मंदिर में नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा हुई. मंडरो प्रखंड के मंडरो, भगैया एवं मिर्जाचौकी के आसपास के क्षेत्रों में मां चंद्रघंटा की पूजा की गयी. पूजा को सफल बनाने में पूजा समिति के अध्यक्ष शंभु जायसवाल, बद्री भगत, प्रमोद गुप्ता, बालेश्वर भगत, रामविलाश गुप्ता, संजय जायसवाल, दिलीप चौरसिया सहित दर्जनों पूजा समिति के लोग जुटे हैं.
