बिपिन की रिपोर्ट
Ranchi Sadar Hospital News: सदर अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग की लिफ्ट में मंगलवार को 28 साल का एक युवक काफी देर तक लिफ्ट में फंसा रहा. युवक का नाम छोटू महतो था जो नामकुम इलाके का रहने वाला बताया गया. परिजन रीता कुमारी का अस्पताल के अंदर इलाज चल रहा था और वह लेबर वार्ड में भर्ती थी. वह मंगलवार अहले सुबह 04 बजे अस्पताल के न्यू बिल्डिंग ब्लॉक वार्ड की तरफ से नीचे आ रहे थे. इस क्रम में लिफ्ट चलते-चलते फंस गया. लिफ्ट बंद होते ही लिफ्ट के अंदर कुछ देर के लिए घुप्प अंधेरा छा गया, वह डरकर जोर-जोर से बाहर निकालने की गुहार लगाने लग गया. युवक ने फोन पर इसकी सूचना देनी चाही लेकिन किसी जानने वाले ने उसका फोन कॉल रिसीव नहीं किया. लगभग एक घंटे तक युवक चिल्लाता रहा, बाद में उसके चिल्लाने की आवाज वहां से गुजर रही अस्पताल की एक नर्स के कानों तक पहुंची. लेकिन, सबसे बड़ी बात की वहां कोई भी लिफ्टमैन मदद के लिए ड्यूटी पर मौजूद नहीं था.
लिफ्ट फंसने की सूचना अस्पताल प्रबंधन को दी गई, लेकिन रेस्क्यू के लिए तत्काल सहायता नहीं मिली. मौके पर धीरे-धीरे अस्पताल में मौजूद लोग जमा हो गए, उन्होंने भी मदद करनी चाही लेकिन बात नहीं बनी. मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो परिजनों और मौजूद लोगों ने कई बार लिफ्ट ऑपरेटर, टेक्नीशियन और इमरजेंसी नंबरों पर कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. बाद में टेक्नीशियन और अन्य लोगों के सहयोग से उन्हें सुबह करीब 6:00 बजे किसी तरह से बाहर निकाला गया. करीब दो घंटे की मशक्कत और अफरा-तफरी के बाद युवक को सुरक्षित बाहर निकाला गया. युवक ने बाद में मौके पर मौजूद अस्पताल से जुड़े स्टाफ को इसकी लिखित शिकायत भी दी.
रात के वक्त अक्सर अटकता है लिफ्ट
सदर अस्पताल, रांची में मरीजों और हॉस्पिटल स्टॉफ के लिए 10 पैसेंजर कैपेसिटी वाला छह लिफ्ट, 15 पैसेंजर वाला 04 लिफ्ट लगाया गया है, ताकि ऊपरी तल्ले पर आवागमन सुगम तरीके से हो सके. लेकिन, कई बार खासकर रात के वक्त बिजली जाने या कुछ तकनीकी खामियों के चलते अक्सर यह लिफ्ट अटक जाती है. खासकर ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीजों और उनके परिजनों को लिफ्ट चलाने और इसके अचानक बंद पड़ जाने पर रेस्क्यू की जानकारी ठीक से नहीं रहती.
एसी वाली कंपनी को लिफ्ट मेंटेनेंस का जिम्मा
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लिफ्ट का सेंसर शायद काम नहीं कर रहा था. अगर लिफ्ट के दरवाजे का सेंसर और ऑटोमेटेड रेस्क्यू सिस्टम काम करता, तो शायद यह हादसा नहीं होता. सदर अस्पताल में एयरकंडिशनिंग का काम देख रही सर्विस कंपनी मेसर्स सिद्धिविनायक को ही लिफ्ट मेंटेनेंस का भी जिम्मा दे दिया गया है, जबकि उसका अनुभव इस क्षेत्र में है ही नहीं. लिफ्ट मेंटेनेंस और सर्विस के नाम पर ऑपरेशनल कंपनी को हर महीने 2.5 लाख से ज्यादा का भुगतान होता है. घटना ने लिफ्ट की सुरक्षा और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
तीन लिफ्ट ऑपरेटर के भरोसे चल रहा 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल
अस्पताल के इस लिफ्ट में कोई लिफ्टमैन की व्यवस्था नहीं थी. मरीजों के लिए जो लिफ्ट है, उसमें लिफ्टमैन की अति आवश्यकता होती है. यहां कई मरीज गांव-देहात से इलाज के लिए आते हैं और उन्हें लिफ्ट चलाने की जानकारी नहीं होती. पूर्व में दर्जनों लिफ्टमैन की नियुक्ति आउटसोर्स के माध्यम से पहले कई लिफ्ट मैन की नियुक्ति की गई लेकिन बाद में उन्हें सिविल सर्जन कार्यालय के द्वारा अलग-अलग कार्यों में लगा दिया गया. अस्पताल में तैनात तीन लिफ्ट मैन में से एक इमामुद्दीन अंसारी को टेक्निकल कार्यों से हटाकर सीएस कार्यालय के सिविल कार्यों में लगा दिया गया है.
ये भी पढ़ें: मंगलवार को सीएम हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में होगी कैबिनेट की बैठक, मॉनसून सत्र पर लग सकती है मुहर
ये भी पढ़ें: लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश ने माउंट कुन फतह कर रचा इतिहास, सैनिक स्कूल तिलैया से कर चुके हैं पढ़ाई
