Yogendra Prasad Review, रांची (मनोज कुमार सिंह की रिपोर्ट): रांची के कांके स्थित विश्व सभागार में शुक्रवार को पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने विभागीय कार्यों की समीक्षा की. बैठक की शुरुआत में वरीय अधिकारियों ने बड़े-बड़े दावे करते हुए कहा कि राज्य में खराब चापाकलों की सभी शिकायतों को दूर कर दिया गया है और हेल्पलाइन नंबर सुचारु रूप से चल रहा है. लेकिन मंत्री को इन दावों पर संदेह हुआ और उन्होंने मौके पर ही दूध का दूध और पानी का पानी करने का फैसला किया.
खुद कॉल कर जाना जमीनी हाल
अधिकारियों की मौजूदगी में ही मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने खुद एक आम नागरिक बनकर कुछ कनीय अभियंताओं (JE) को फोन मिलाया. उन्होंने शिकायत की कि उनके इलाके का चापाकल खराब है. जवाब में अभियंता ने न केवल टालमटोल की, बल्कि लंबित मामलों का हवाला देते हुए व्हाट्सएप पर आवेदन भेजने को कह दिया. इस एक फोन कॉल ने विभाग के उन दावों की हवा निकाल दी, जिसमें कहा जा रहा था कि शिकायतों का समाधान तत्काल हो रहा है.
अधिकारियों की ‘भूगोल’ परीक्षा में फेल हुए अफसर
समीक्षा के दौरान मंत्री ने सरायकेला के एक अधिकारी को फोन कर एक काल्पनिक पंचायत का नाम बताया. अधिकारी उस क्षेत्र को पहचान तक नहीं सका, जिससे मंत्री का पारा चढ़ गया. उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि जनता को गुमराह करना बंद करें. उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिया कि अधिकारी गलत जानकारी देकर उन्हें गुमराह न करें, अन्यथा कड़ी विभागीय कार्रवाई के लिए तैयार रहें.
गुणवत्ता और समयसीमा का अल्टीमेटम
मंत्री ने जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की धीमी प्रगति पर भी असंतोष जताया. उन्होंने निर्देश दिया कि कंट्रोल रूम की जवाबदेही तय की जाए और हर ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना सुनिश्चित करें. उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे होने चाहिए.
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