प्रतिनिधि, चान्हो.
अमर शहीद वीर बुधू भगत के जन्मस्थल सिलागांई में शनिवार को सामाजिक पाड़हा व्यवस्था और पेसा कानून को लेकर एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी. वीर बुधू भगत स्मारक समिति के अध्यक्ष शिवपूजन भगत और महासचिव गोपाल भगत के नेतृत्व में आयोजित कार्यशाला में पाड़हा दिवान भउवा उरांव, प्रो रामकिशोर, प्रो रामदास उरांव, पूर्व डीडीसी डॉ परमेश्वर भगत व प्रभाकर कुजूर ने विचार व्यक्त किये. भउवा उरांव ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में पाड़हा व्यवस्था को संरक्षित रखना बड़ी चुनौती है. हमारे पूर्वजों ने आदिकाल से इस व्यवस्था को जीवंत रखा है. जिसे आगे उसी स्वरूप में बरकरार रखने की जिम्मेदारी हमारे सामाजिक अगुवा के साथ हमारे नौजवान साथियों पर है. उन्होंने आदिवासी समाज के अंदर जन्म से लेकर मृत्यु तक के तमाम संस्कार पर विस्तार से प्रकाश डाला. पाड़हा पदाधिकारियों के अधिकार व उनके कर्तव्य को भी बताया. अन्य वक्ताओं ने भी लोगों को पाड़हा व्यवस्था और पेसा कानून की विस्तृत जानकारी दी. मौके पर अल्फ्रेड मिंज, शंभू भगत, एतवा उरांव, मंगलदेव उरांव, मुखिया गुड़िया कुमारी, महादेव भगत, जौनी उरांव, सुनील उरांव, शीबा उरांव सहित विभिन्न गांव के पहान, पुजार, बुद्धिजीवी व अन्य मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
