मंईयां योजना फ्री बीज नहीं, महिलाओं का हो रहा उत्थान : किशोर

सरकार का 4296 करोड़ रुपये का पहला अनुपूरक बजट विपक्ष के वॉकआउट के बीच ध्वनिमत से पारित हो गया.

रांची. सरकार का 4296 करोड़ रुपये का पहला अनुपूरक बजट विपक्ष के वॉकआउट के बीच ध्वनिमत से पारित हो गया. दूसरी पाली में विपक्षी सदस्यों ने सूर्या हांसदा की मौत की सीबीआइ जांच कराने की मांग की. प्रस्तावित रिम्स टू का स्थान बदलने की मांग को लेकर वेल में आ गये. सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. सरकार को आदिवासियों का विरोधी बताया. हल्ला के बीच सदन 3.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. सदन शुरू होने के बाद विपक्षी सदस्य फिर वेल में आकर विरोध करने लगे. बाद में वॉकआउट कर गये. इसके बाद अनुपूरक बजट पर सरकार का पक्ष रखते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि विपक्ष कह रहा है कि मंईयां योजना फ्री बीज स्कीम है. उनको पता होना चाहिए कि मंईयां योजना से राज्य में महिलाओं का उत्थान हो रहा है. बच्चे स्कूल जा रहे हैं. फ्री बीज को पूर्व की सरकार ने उज्ज्वला योजना से गैस चूल्हा देकर किया है. आज गैस भराने वाला कोई नहीं है. अनुपूरक बजट में सरकार ने जो पैसे का प्रावधान किया है, वह जनहित का पैसा है. सरकार ने अपने संसाधन से पैसा जुटाया है. इसमें पारा शिक्षकों के वेतन व अन्य मद के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वर्तमान सरकार ने 1.5 लाख बेरोजगारों को नौकरी दी है.

सीबीआइ तो केंद्र की एजेंसी, खुद जांच करा ले

श्री किशोर ने कहा कि भाजपा डबल स्टैंडर्ड की दिशा में काम कर रही है. सीबीआइ तो केंद्र की एजेंसी है. केंद्र को सूर्या हांसदा मामले की खुद जांच करा लेना चाहिए. सीबीआइ स्वत: संज्ञान लेकर भी जांच कर सकती है. सरकार राज्यहित और जनहित में निर्णय ले रही है. कटौती प्रस्ताव पेश करते हुए सत्येंद्र तिवारी ने कहा कि सरकार को सूर्या हांसदा की सीबीआइ जांच करानी चाहिए. ग्रीन लैंड में रिम्स टू का निर्माण नहीं होना चाहिए तथा गैरमजरुआ जमीन का निबंधन करना चाहिए. सरकार इस मामले में दोहरा मापदंड अपना रही है. एक ओर निबंधन कराने की बात कहती है. दूसरी ओर इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट चली गयी है. प्रस्ताव का विरोध करते हुए हेमलाल मुरमू ने कहा कि विपक्ष की कोई नीति नहीं है. विपक्ष को वर्तमान सरकार बर्दाश्त नहीं हो रही है. आगे भी विपक्ष को 20 साल इंतजार करना होगा. राजेश कच्छप ने कहा कि भाजपा वाले लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं. एजेंसियों के माध्यम से सत्ता चाहती है. लोकतंत्र समाप्त करना चाहती है.

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