Sohrai Painting: सोहराई पेंटिंग के जरिये आत्मनिर्भर बन रहीं महिलायें, इस फाउंडेशन की पहल से मिला रोजगार

Sohrai Painting: झारखंड में सोहराई पेंटिंग के जरिये महिलायें आर्थिक रूप से सशक्त और मजबूत बन रही हैं. उषा मार्टिन फाउंडेशन इसमें ग्रामीण महिलाओं की मदद कर रहा है. फाउंडेशन के जरिये महिलाओं को रोजगार दिया जाता है. महिलाएं सोहराई पेंटिंग, बांस हस्तशिल्प और मछली पालन जैसे विविध क्षेत्रों में स्वरोजगार से जुड़ रही हैं.

Sohrai Painting: झारखंड में उषा मार्टिन फाउंडेशन ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार ठोस पहल कर रहा है. जानकारी के अनुसार, टाटीसिलवे और आसपास के गांवों में अब तक 85 से अधिक महिलाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण से जोड़ा गया है. इसके साथ ही महिलाओं को जूट बैग, फोल्डर व कागज के ठोंगे बनाने का काम सिखाया गया है. फाउंडेशन ने इन्हें ठोंगा निर्माण से भी जोड़ा है. समूह अब प्रतिदिन एक स्थानीय कंज्यूमर स्टोर को 1000 ठोंगे उपलब्ध करा रहा है.

सोहराई पेंटिंग से अर्जित की आय

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बताया जाता है कि फाउंडेशन ने महिलाओं को पारंपरिक सोहराई पेंटिंग, बांस हस्तशिल्प और मछली पालन जैसे विविध क्षेत्रों में स्वरोजगार से जोड़ा है. इसी का प्रतिफल है कि हरातू गांव की महिलाओं ने ‘रोशनी स्वयं सहायता समूह’ बनाकर सोहराई पेंटिंग के जरिए केवल तीन महीने में 40000 की आय अर्जित की है. ये समूह की महिलाएं अब न केवल खुद पेंटिंग करती हैं, बल्कि उनके लिए आवश्यक सामग्री जुटाने और विपणन का कार्य भी स्वयं कर रही हैं.

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ठेले से आसान हुआ स्वरोजगार

फाउंडेशन के पदाधिकारियों के साथ रोजगार पाने वाली महिलायें

गांवों की महिलाओं की मांग पर फाउंडेशन ने उन्हें स्वचालित ठेले भी उपलब्ध कराये हैं. इसमें गीता लिंडा (आरा), प्रेमिका कुजूर, नीलम कुमारी (हेसल), दमयंती गारी (बरकुंबा) व पूनम देवी (हरातू) शामिल हैं. इन महिलाओं का कहना है कि पहले संसाधनों की कमी के कारण काम शुरू करना कठिन था. पर अब स्वरोजगार की राह आसान हो गयी है.

फाउंडेशन के प्रमुख ने क्या बताया

वहीं, उषा मार्टिन फाउंडेशन के प्रमुख डॉ मयंक मुरारी बताते हैं कि वर्ष 2024 में फाउंडेशन ने 300 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को टेलरिंग, ब्यूटिशियन, फूड एंड बेवरेज, फैशन डिजाइनिंग, कढ़ाई, कप-प्लेट निर्माण और अन्य रोजगारमूलक कार्यों से जोड़ा है. फाउंडेशन की ओर से सुदूरवर्ती गांवों में संचालित एकल विद्यालयों में अब सोलर लाइट, दरी, किताबें व खेल सामग्री भी उपलब्ध करायी गयी है.

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शिक्षा की गुणवत्ता को बना रही बेहतर

इस संबंध में शिक्षा समन्वयक वरुण कुमार के अनुसार, बैजनाथ टाटा, सिरका, असरी, शासनबेड़ा, जराटोली, बानपुर, जरगा, मेढ़ा, कामता और जिदू जैसे गांवों में यह पहल शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बना रही है. 15 आदिवासी युवतियों को एकल विद्यालयों में शिक्षक बनाया गया है.

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लेखक के बारे में

By Rupali Das

नमस्कार! मैं रुपाली दास, एक समर्पित पत्रकार हूं. एक साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं. यहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पहले दूरदर्शन, हिंदुस्तान, द फॉलोअप सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी काम करने का अनुभव है.

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