रांची: रांची विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में पीएचडी नामांकन को लेकर विद्यार्थियों ने सवाल उठाये हैं. बुधवार को विद्यार्थियों ने कुलपति प्रो. सरोज शर्मा और रजिस्ट्रार डॉ. आरके शर्मा से मुलाकात कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की. विद्यार्थियों का दावा है कि विभाग में करीब 35 प्रतिशत विद्यार्थी पश्चिम बंगाल के हैं.
विद्यार्थियों ने कुलपति को बताया कि पश्चिम बंगाल के एससी कोटे के विद्यार्थी भी रांची विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में सामान्य कोटे के तहत पीएचडी में नामांकन ले रहे हैं. विद्यार्थियों के अनुसार, विश्वविद्यालय के नियम में यूजीसी-नेट और जेआरएफ उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दिये जाने के कारण ऐसा हो रहा है. उनका कहना था कि इससे झारखंड के सामान्य वर्ग के विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं और अच्छे अंक होने के बावजूद सीट नहीं बचने के कारण उन्हें पीएचडी से वंचित होना पड़ रहा है.
भुक्तभोगी विद्यार्थियों ने कुलपति से पूरे मामले की जांच कराने का आग्रह किया. विद्यार्थियों ने कहा कि वर्ष 2024-25 में विभागीय स्तर पर उनका पीएचडी के लिए नामांकन लिया गया था. इसके बाद उन्होंने कोर्स वर्क भी पूरा कर लिया. अब विभाग की ओर से उन्हें नयी पीएचडी गाइडलाइन के तहत दोबारा आवेदन करने और इंटरव्यू में शामिल होने को कहा जा रहा है.
विद्यार्थियों ने कहा कि दोबारा चयन की प्रक्रिया में शामिल होने का निर्देश उनके साथ अन्याय है, क्योंकि विभाग पहले ही उनका नामांकन ले चुका है और वे कोर्स वर्क भी पूरा कर चुके हैं.
कुलपति ने कहा- नये नियम के तहत भरना होगा फॉर्म
कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने विद्यार्थियों की बातें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि सभी विद्यार्थियों को नये नियम के अनुसार पीएचडी नामांकन फॉर्म भरना होगा और इंटरव्यू में शामिल होना पड़ेगा. चयनित होने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कोर्स वर्क से छूट दी जायेगी.
इस पर विद्यार्थियों ने सवाल उठाया कि जब उनका नामांकन विभागीय स्तर पर पहले ही हो चुका है और कोर्स वर्क भी पूरा कराया जा चुका है, तो दोबारा चयन प्रक्रिया में शामिल होने की जिम्मेदारी विद्यार्थियों की क्यों हो. उनका कहना था कि यदि प्रक्रिया में कोई गलती हुई है, तो इसके लिए विभाग जिम्मेवार है.
विद्यार्थियों ने कुलपति से आग्रह किया कि उन्हें दोबारा नामांकन और इंटरव्यू की प्रक्रिया में भेजने के बजाय सीधे पीएचडी रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश दिया जाये, ताकि उनका समय और शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने से बच सके.
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