रांची की प्यास बुझाने वाली पाइपलाइन खुद हो गई लाचार, दीपा टोली के पास 24 घंटे बह रहा करोड़ों लीटर पानी

रांची की जीवनरेखा, गेतलसूद डैम से शहर को पानी पहुंचाने वाली मुख्य पाइपलाइन 50 साल पुरानी हो चुकी है और जगह-जगह से लीक कर रही है. दीपा टोली के पास लगातार हो रहे इस रिसाव से करोड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, जिससे शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति भी प्रभावित हो रही है.


Water Pipeline Leakage: झारखंड की राजधानी रांची के हजारों परिवारों तक पेयजल पहुंचाने वाली मुख्य पाइपलाइन इन दिनों खुद बदहाल स्थिति में है. गेतलसूद डैम से शहर में पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन में दीपा टोली के ठीक सामने लगातार लीकेज हो रहा है. यह रिसाव दिन-रात जारी है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या के कारण कई इलाकों में जलापूर्ति भी प्रभावित हो रही है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया है.

60 हजार से अधिक घरों तक होती है पानी की आपूर्ति

गेतलसूद डैम से प्रतिदिन करीब 33 करोड़ लीटर पानी राजधानी रांची को उपलब्ध कराया जाता है. इसी पाइपलाइन के माध्यम से शहर के 60 हजार से अधिक घरों में हाउसहोल्ड कनेक्शन के जरिए पेयजल पहुंचता है. अनुमान है कि रांची की लगभग 80 प्रतिशत आबादी की प्यास इसी जलापूर्ति व्यवस्था पर निर्भर है. ऐसे में मुख्य पाइपलाइन में लगातार हो रहा रिसाव चिंता का विषय बन गया है.

लीकेज से जलापूर्ति भी हो रही प्रभावित

स्थानीय लोगों के अनुसार पाइपलाइन से लगातार पानी बहने के कारण कई इलाकों में पानी का दबाव कम हो जाता है. इसका असर घरों तक होने वाली नियमित जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है. एक ओर लोग निर्धारित समय पर पानी का इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों लीटर पानी बिना उपयोग के नालों में बहकर बर्बाद हो रहा है. गर्मी और जल संकट की आशंका के बीच यह स्थिति और गंभीर मानी जा रही है.

50 साल पुरानी पाइपलाइन बनी परेशानी की वजह

बताया जाता है कि जिस पाइपलाइन से पानी का रिसाव हो रहा है, वह करीब 50 वर्ष पुरानी हो चुकी है. लंबे समय से उपयोग में रहने के कारण पाइपलाइन कई स्थानों पर कमजोर पड़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी पुरानी पाइपलाइन की समय-समय पर तकनीकी जांच और जरूरत पड़ने पर उसका प्रतिस्थापन किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में बड़े नुकसान से बचा जा सके.

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प्लास्टिक की पन्नी बांधकर लीकेज रोकने की कोशिश

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पाइपलाइन के लीकेज को रोकने के लिए जलापूर्ति विभाग ने स्थायी मरम्मत के बजाय प्लास्टिक की पन्नी बांधकर अस्थायी उपाय किया है. इसके बावजूद पानी का रिसाव बंद नहीं हुआ. पाइपलाइन से निकलने वाला पानी खेलगांव स्टेडियम और गाड़ी गांव के बीच से गुजरने वाले नाले में गिरकर लगातार बर्बाद हो रहा है. स्थानीय लोगों ने विभाग से जल्द स्थायी मरम्मत कराने और पुरानी पाइपलाइन को बदलने की मांग की है. लोगों का कहना है कि जिस पाइपलाइन से राजधानी की प्यास बुझती है, उसकी अनदेखी भविष्य में बड़ी जलापूर्ति समस्या खड़ी कर सकती है. "पानी बचाने" के संदेश लिख देना आसान है, लेकिन करोड़ों लीटर पानी को प्लास्टिक की पन्नी के भरोसे छोड़ देना सरकारी व्यवस्था की विडंबना को भी उजागर करता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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