रांची : भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर पारित किए गए संकल्प पर झारखंड का सियासी पारा चढ़ गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने बीजेपी के इस कदम पर तीखा हमला बोलते हुए उनके रुख को देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत का अपमान और गॉडसे की विचारधारा का विस्तार करार दिया है.
'गॉडसे के अनुयायी फिर राष्ट्रनायकों का कर रहे विरोध'
मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का यह नया कदम महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान राष्ट्रनायकों के सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है. उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी का यह रुख महात्मा गांधी और सरदार पटेल की विरासत पर सीधा हमला है. ऐसा लगता है कि गॉडसे के अनुयायी एक बार फिर 'वंदे मातरम' के नाम पर देश के राष्ट्रीय नायकों को नीचा दिखाने और उनके योगदान को नकारने का प्रयास कर रहे हैं. इतिहास गवाह है कि ये वही लोग हैं जिन्होंने आजादी के आंदोलन के दौरान अंग्रेजों से लिखित माफी मांगी थी और उनसे पेंशन प्राप्त करते थे."
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क्या है 'वंदे मातरम' पर छिड़ा पूरा राजनीतिक विवाद?
यह नया राजनीतिक विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस (CWC) ने अपने पुराने यानी 1937 के फैसले को दोबारा दोहराया. उन्होंने तय किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के सिर्फ शुरुआती दो हिस्से (छंद) ही गाए जाएंगे. इसके जवाब में भाजपा ने पूरे छह छंदों वाले 'वंदे मातरम' को अनिवार्य रूप से सम्मान देने और गाने के समर्थन में एक राष्ट्रव्यापी प्रस्ताव पारित कर दिया और कांग्रेस पर राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर का आरोप लगाया. वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस का स्पष्ट तर्क है कि वे आजादी के आंदोलन के समय से चले आ रहे महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर वाले 1937 के आधिकारिक रुख का ही पालन कर रहे हैं. कांग्रेस के अनुसार, भाजपा इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाना चाहती है.
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