एनईपी नियमावली के ड्राफ्ट का वित्तरहित शिक्षण संस्थानों ने किया विरोध, आंदोलन की चेतावनी

Ranchi News: झारखंड के वित्तरहित शिक्षण संस्थानों ने एनईपी 2020 के तहत प्रस्तावित नियमावली के ड्राफ्ट का विरोध किया है. रांची में हुई बैठक में शिक्षकों और प्राचार्यों ने दोबारा प्रस्वीकृति प्रक्रिया को गलत बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी. संस्थानों ने सरकारी स्कूलों जैसी समान शर्तें लागू करने की मांग उठाई. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड में संचालित वित्तरहित शिक्षण संस्थानों ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत प्रस्तावित नियमावली के ड्राफ्ट का कड़ा विरोध किया है. सोमवार को राज्यभर से आए 500 से अधिक प्राचार्यों, प्रधानाचार्यों और शिक्षक प्रतिनिधियों ने रांची के धुर्वा स्थित सर्वोदय बाल निकेतन उच्च विद्यालय परिसर में बैठक कर सरकार के प्रस्तावित नियमों को अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण बताया. यह बैठक झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित की गई थी. बैठक की अध्यक्षता चंदेश्वर पाठक ने की, जबकि मंच संचालन गणेश महतो ने किया.

पहले से स्वीकृत संस्थानों को दोबारा मान्यता क्यों

झुलसती गर्मी में अंदोलनरत शिक्षक

बैठक में शिक्षक प्रतिनिधियों ने सरकार से सवाल पूछा कि जब राज्य सरकार पूर्व में नियमावली के तहत वित्तरहित संस्थाओं को प्रस्वीकृति दे चुकी है, तो अब दोबारा प्रस्वीकृति लेने की आवश्यकता क्यों उत्पन्न की जा रही है. प्रतिनिधियों ने कहा कि जिस तरह सरकारी विद्यालयों को उत्क्रमित किया गया है, उसी प्रकार राज्य की लगभग 600 प्रस्वीकृत वित्तरहित संस्थाओं को भी उत्क्रमित किया जाए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी प्रस्वीकृत संस्था किसी भी परिस्थिति में पुनः प्रस्वीकृति के लिए आवेदन नहीं देगी. शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि नवम से 12वीं तक संचालित वित्तरहित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय और संस्कृत विद्यालयों को नई शिक्षा नीति के तहत फिर से मान्यता लेने को मजबूर किया गया तो राज्य के 10 हजार से अधिक शिक्षक और कर्मचारी सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे.

नियमों में भिन्नता पर सवाल

विरोध-प्रदर्शन के दौरान हाथ उठाकर समर्थन करते शिक्षक

बैठक में कई शिक्षक प्रतिनिधियों ने सरकार की प्रस्तावित शर्तों पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि कई सरकारी विद्यालयों में एक-एक हजार वर्गफीट की प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय तक उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी उन पर ऐसी सख्त शर्तें लागू नहीं की जा रही हैं. प्रतिनिधियों ने कहा कि जब संस्थानों को पहले ही सरकार के नियमों और अधिनियमों के आधार पर प्रस्वीकृति मिल चुकी है और सुरक्षा राशि भी जमा कराई जा चुकी है, तो अब फिर से चार लाख और छह लाख रुपये सुरक्षा कोष जमा कराने की मांग उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि नियमावली 2008 के अनुसार शहरी क्षेत्रों में स्कूलों के लिए 50 डिसमिल जमीन की आवश्यकता थी और उसी आधार पर संस्थानों को मान्यता दी गई थी. अब दो एकड़ जमीन की अनिवार्यता थोपना व्यवहारिक नहीं है.

सरकारी स्कूलों जैसी शर्तें ही मान्य होंगी

हाथ उठाकर अपना समर्थन जताते शिक्षिक और शिक्षिकाएं.

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि वित्तरहित स्कूल और कॉलेज वही शर्तें मानेंगे, जो सरकारी विद्यालयों के लिए लागू होंगी. प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकारी विद्यालयों के लिए एक एकड़ जमीन और वित्तरहित संस्थानों के लिए दो एकड़ जमीन की शर्त न्यायसंगत नहीं है. शिक्षक प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि शासी निकाय के गठन का अधिकार अधिनियम में निहित है, इसलिए केवल नियमावली के माध्यम से इसे समाप्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि नियमावली में शासी निकाय को लेकर जो प्रावधान किए गए हैं, वे अधिनियम की मूल भावना के विपरीत हैं. प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि बिना अधिनियम में संशोधन किए इन नियमों को लागू करना संभव नहीं है.

आंदोलन की घोषणा, सरकार को चेतावनी

विरोध-प्रदर्शन में शामिल शिक्षक

बैठक में प्रस्तावित नियमावली के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन का भी ऐलान किया गया. मोर्चा की ओर से कहा गया कि 29 मई को मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को ज्ञापन सौंपकर नियमावली के ड्राफ्ट में बदलाव की मांग की जाएगी. इसके बाद 2 जून को राज्य के सभी 600 संस्थानों में नियमावली के ड्राफ्ट की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. वहीं 12 जून को लोक भवन के सामने एक दिवसीय महाधरना आयोजित कर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा. मोर्चा ने यह भी घोषणा की कि महाधरना के बाद शिक्षक और कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे. साथ ही शासी निकाय से विधायकों को हटाने के निर्णय के खिलाफ राज्य के विधायकों को भी ज्ञापन दिया जाएगा.

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बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधि रहे मौजूद

विरोध-प्रदर्शन में शामिल शिक्षक-शिक्षिकाएं

बैठक में कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, संजय कुमार, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, फजलुल कादरी अहमद, मनीष कुमार, नरोत्तम सिंह, पशुपति महतो, देवनाथ सिंह, डालेंश चौधरी, मनोज कुमार, मनोज तिर्की, विनय उरांव, मुरारी प्रसाद सिंह, अर्जुन कुमार पांडेय, नंदेश्वरी कुमारी, उमा सेन गुप्ता, सीमा बाखला और सिस्टर टोपनो समेत कई शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे. बैठक के दौरान सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो राज्यव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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