Ranchi news : साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने बताये डिजिटल एविडेंस संग्रह करने के गुर

अॉनलाइन कार्यशाला में दीपक कुमार ने अधिवक्ताओं को दी गयी जानकारी

रांची. डिजिटल एविडेंस को पुलिस संग्रह तो करती है, लेकिन कोर्ट में उसे लॉ के अनुरूप प्रस्तुत करने में असफल होती है, जिससे कोर्ट ऐसे एविडेंस को मान्यता देने से इंकार कर देता है. डिजिटल सामग्री जैसे वेब पेज, फेसबुक पोस्ट और ट्वीट कानूनी मामलों के दौरान साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन इसे हमेशा अदालतों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है, क्यूं कि स्क्रीनशॉट को कोर्ट एविडेंस मानने के लिए आज भी तैयार नहीं होता है. उक्त बातें साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट दीपक कुमार ने कही. वह साइबर क्राइम : ए रिव्यू ऑफ द एविडेंस के ऑनलाइन कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों के अधिवक्ता को संबोधित कर रहे थे.

स्क्रीनशॉट डेस्कटॉप मोड में लें

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट दीपक कुमार ने कहा कि किसी भी अन्य साक्ष्य की तरह डिजिटल साक्ष्य स्वीकार्य माने जाने के लिए एक निश्चित मानक को पूरा करना होगा. यदि कोई स्क्रीनशॉट लिया जाये, तो उसे डेस्कटाॅप मोड में लिया जाना चाहिए. इससे उसका यूआरएल पता चलेगा. साथ ही यह पता चला पायेगा कि वह फेसबुक, इंस्टाग्राम व ट्वीटर का स्क्रीनशॉट है. इसके साथ ही सोशल साइट्स का स्क्रीनशॉट डिटेल के बारे में फेसबुक, इंस्टाग्राम व ट्वीटर से लीगल रूप से पत्राचार करें ताकि मेटा का डेटा कलेक्ट कर उसे कोर्ट में एविडेंस के रूप में प्रस्तुत किया जा सके. कोर्ट में वह एविडेंस सजा दिलाने में काम आयेगा. मोबाइल से सही तरीके से स्क्रीनशॉट नहीं लिये जाने के कारण 90 प्रतिशत स्क्रीनशॉट को कोर्ट में मान्यता नहीं मिल पाती है.

सीधे जांच न करें, हैश वैल्यू निकालें

दीपक कुमार ने कहा कि पुलिस किसी साइबर अपराधी के मोबाइल की सीधे जांच न करे. इससे उन पर एविडेंस में छेड़छाड़ करने का आरोप लग सकता है. फोटो, वीडियो, ऑडियो पुलिस सही तरीके से संग्रह नहीं कर पाती है. कई बार एविडेंस का बिना ” हैश वैल्यू “निकाले इन्वेस्टिगेशन करने लगती है. जिससे छेड़छाड़ का आरोप लग जाता है. कई बार पुलिस जो स्क्रीनशॉट लेती है, उसमें वेब एड्रेस ही नहीं आता है.

साक्ष्य ऐप के आधार पर एविडेंस जुटायें

नये कानून बीएनएस में साक्ष्य ऐप दिया गया है. उसके आधार पर एविडेंस संग्रह करें. यह कोर्ट में भी मान्य है. यदि किसी दुकानदार से सीसीटीवी फुटेज लेते हैं, तो उस दुकानदार से इलेक्ट्रॉनिक्स एविडेंस एक्ट 65 बी का सर्टिफिकेट अवश्य लें. यह एक्ट साफ करता है कि उस सीसीटीवी फुटेज में कोई छेड़छाड़ नहीं किया गया है.

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