पाड़हा जतरा के 60 वर्ष की यात्रा में मजबूती से खड़ा है आदिवासी समाज

बेड़ो व बारीडीह में बुधवार को ऐतिहासिक पाड़हा जतरा सह सभा का आयोजन किया गया

प्रतिनिधि, बेड़ो.

बेड़ो व बारीडीह में बुधवार को ऐतिहासिक पाड़हा जतरा सह सभा का आयोजन किया गया. बेड़ो बाजारटांड़ व बारीडीह बगीचा में हजारों की संख्या में पाड़हा प्रेमी शामिल हुए और अपनी एकजुटता का परिचय दिया. दोनों स्थलों पर पाड़हा निशान लकड़ी के बने हाथी, घोड़ा व सांढ़ पर सवार होकर पाड़हा राजा रंपा-चंपा, ढंगरा झाता, झंडा, ढोल-नगाड़ा के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गयी. बेड़ो बाजारटांड़ में आयोजित वें 60वां वार्षिक पाड़हा जतरा सह सभा समारोह का नेतृत्व पूर्व कुलपति डाॅ रविंद्र नाथ भगत ने किया. समारोह में मुख्य अतिथि सांसद सुखदेव भगत, पद्मश्री मुकुंद नायक व पद्मश्री मधु मंसूरी व पाड़हा राजाओ को अंगवस्त्र व पगड़ी पहना कर सम्मानित किया गया. मुख्य अतिथि सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि स्व करमचंद भगत द्वारा शुरू किया गया पाड़हा जतरा का 60 वर्ष की यात्रा में आदिवासी समाज मजबूती से खड़ा है. उन्होंने केसा मोड़ में पाड़हा जतरा के संस्थापक स्व करमचंद भगत की प्रतिमा लगाने की घोषणा की. पाड़हा संरक्षक सह पूर्व कुलपति डॉ रविन्द्र नाथ भगत ने कहा कि पाड़हा जतरा हमारे बाबा करमचंद भगत ने शुरू किया था. जतरा में उनके पोता-पोती नजर आ रहे हैं. सनी टोप्पो ने कहा कि पाड़हा व्यवस्था की संस्कृति और सभ्यता पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है. इसे बचाये रखना है. प्रो रामनारयण भगत ने कहा कि पाड़हा व्यवस्था समाज में रहनेवाले सभी जाति समुदाय के लोग आते हैं. अध्यक्षता प्रो मंगा उरांव व संचालन प्राचार्य गोयन्दा उरांव ने किया. जतरा में राजाओं में 21 पड़हा राजा शिव कुमार उरांव, 12 पाड़हा प्रदीप पहान, 10 पाड़हा सुबोध लकड़ा, 21 पाड़हा बबलू पहान, 22 पाड़हा लोदो मुंडा, 21 पाड़हा मदन उरांव, 12 पड़हा राजा शनी उरांव, 10 पाड़हा रोहित मिंज, आठ पाड़हा चरवा महतो, सात पड़हा राजा जीतू उरांव, 22 पड़हा राजा गणेश पहान को पगड़ी पहना कर व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. जतरा को सफल बनाने में मुन्ना बड़ाइक, सचिव विशु उरांव, उपाध्यक्ष सुकरा उरांव, प्रो बिरसा उरांव, डाॅ मथुरा राम उस्ताद आदि दर्जनों ग्रामीणों ने सराहनीय योगदान दिया.

इधर, बारीडीह बगीचा में केंद्रीय पाड़हा संचालन समिति ट्रस्ट के संरक्षक डाॅ दिवाकर मिंज व नीलमणी मिंज की अगुवाई में 37वां पाड़हा जतरा में लकड़ी से बने घोड़े, हाथी, रंपा-चंपा, टेंगरा छाता व खोड़हा नृत्य दल के साथ शोभायात्रा निकाली गयी. शोभायात्रा मंच के समीप पहुंचकर जनसभा में तब्दील हो गयी. सभा में मुख्य अतिथि डॉ दिवाकर मिंज ने कहा कि पाड़हा व्यवस्था में लोकतंत्र के तीन स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका के रूप से काम करती है. समिति के अध्यक्ष नीलमणी भगत ने कहा कि दिवंगत पूर्व विधायक विश्वनाथ भगत ने बारीडीह में पाड़हा जतरा का शुभारंभ किया था. पाड़हा को दशा व दिशा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. पाड़हा जतरा में 12 पड़हा राजा विशाल उरांव, 21 पाड़हा राजा महादेव उरांव, 12 पाड़हा दीवान बिरूआ खेस, 12 पाड़हा कोटवार मंगु उरांव, 21 पाड़हा कोटवार इंद्रजीत उरांव, झारखंड आंदोलनकारी एतवा उरांव, कार्यकारी अध्यक्ष जुगेश उरांव, धनंजय कुमार रॉय, सुका उरांव, चरवा उरांव, विश्वनाथ गोप, राकेश भगत, लोहरा उरांव, प्रो सोमरा उरांव, 24 पाड़हा दीवान भऊवा उरांव, अल्फ्रेड मिंज, लीला मुंडा, सुजीत कुमार रॉय, धापा उरांव, पीटर तिर्की, घीनू उरांव, जगन्नाथ उरांव व कुंवर मिंज उपस्थित थे.

बेड़ो व बारिडीह में पाड़हा जतरा में उमड़े लोग, मुख्य अतिथि सांसद सुखदेव भगत बोले

पाड़हा राजा लकड़ी के हाथी-घोड़े पर सवार होकर जतरा स्थल पर पहुंचेB

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