रांची. करम पर्व की पूर्व संध्या पर ओरमांझी प्रखंड के भेलवा टोली अखड़ा, देवी मड़ई बरवे और हेसाहातू अखड़ा में पर्व की तैयारियों को लेकर विचार-विमर्श किया गया. इस दौरान करीब आठ अखड़ा समितियों के बीच 10 मांदर का वितरण किया गया. कार्यक्रम में लोहरदगा विधायक डॉ रामेश्वर उरांव मुख्य अतिथि और प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे.
भाषा, संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहने का आह्वान
डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि करम पर्व आदिवासी संस्कृति, प्रकृति प्रेम और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है. उन्होंने आदिवासी समाज से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहने की अपील की. उन्होंने मातृप्रधान सामाजिक व्यवस्था को मजबूत बनाये रखने और महिलाओं के सम्मान पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति से गहरा संबंध है. करम, साल, कुसुम और बैर जैसे पेड़-पौधे आदिवासी जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं. उन्होंने पुरखों से मिली जमीन को सुरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ी को सौंपने की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया.
डॉ उरांव ने करम पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मांदर की थाप और अखड़ा की परंपरा आने वाली पीढ़ियों को सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का काम करती है.
करम पर्व सामाजिक एकजुटता का प्रतीक : आलोक दुबे
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि आदिवासी समाज की प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली के कारण दुनिया का आकर्षण उसकी संस्कृति की ओर बढ़ा है. उन्होंने करम पर्व को भाई-बहन के प्रेम, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा पर्व बताया.
कार्यक्रम का संचालन रमेश उरांव ने किया. मांदर वितरण के बाद ग्रामीणों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया. मौके पर तुलसी खरवार, सुरेश साहू, अनीता लिंडा, संगीता देवी, जगमोहन मुंडा, सोनिया देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
