एंग्लो इंडियन गांव में नहीं है पर्याप्त स्वास्थ्य चिकित्सा सुविधा

खलारी प्रखंड अंतर्गत एंग्लो इंडियन गांव मैक्लुस्कीगंज में बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध नहीं है.

रोहित कुमार, मैक्लुस्कीगंज.

खलारी प्रखंड अंतर्गत एंग्लो इंडियन गांव मैक्लुस्कीगंज में बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध नहीं है. मैक्लुस्कीगंज को पर्यटन की दृष्टि से ख्याति है. पूरे वर्ष पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. साथ ही गंज को एजुकेशन हब के नाम से भी जाना जाता है. डॉन बॉस्को एकेडमी, जैनेट एकेडमी, कंचेनजंगा इंटरनेशनल स्कूल, सेवा मार्ग मध्य विद्यालय, जाह्नवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, वाइबीएन गुरुकुलम सहित कई शिक्षण संस्थान हैं. पूरे राज्य से बड़ी संख्या में विद्यार्थी छात्रावासों में रहकर पठन-पाठन करते हैं. इतना ही नहीं आदिम जनजाति समुदाय के बिरहोरों व मल्हारों की भी स्वास्थ्य व चिकित्सा व्यवस्था के नाम पर एक मात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है.

लापरवाही से बदल गयी व्यवस्था :

कभी यहां (1954 के लगभग में) सहायक अस्पताल हुआ करता था. उस समय मैक्लुस्कीगंज में स्वास्थ्य व चिकित्सा व्यवस्था बेहतर थे. सेवा में चार डॉक्टर नियुक्त थे. इसके अलावे ड्रेसर, लैब टेक्नीशियन, एंबुलेंस, फाॅर्मासिस्ट सहित डॉक्टरों के रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी. लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहे या फिर सरकार की उदासीन रवैया. कारण जो भी हो स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर सिर्फ एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है. जानकारी के अनुसार एंग्लो इंडियन गांव सहित किसी भी सरकारी अस्पताल में एंटी वेनम, एंटी रेबीज की कोई व्यवस्था नहीं है. बरसात के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है. लोग बेहतर इलाज के अभाव में असमय दम तोड़ देते हैं.

मैक्लुस्कीगंज में ऑपरेशन थियेटर, एनेस्थीसिया के डाॅक्टर, पैथाेलाॅजिस्ट और लैब टेक्नीशियन का जबरदस्त अभाव है. इसके अलावा, गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की आवास की व्यवस्था और जरूरी फर्नीचर की भी कमी है. टेलीमेडिसिन की व्यवस्था भी ठप है.

अस्पताल भवन में ही रह रहे हैं 108 के चालक व सहयोगी :

मैक्लुस्कीगंज में रह रही सबसे वृद्ध एंग्लो इंडियन महिला किटी टैक्सेरा अपने समुदाय सहित पूरे मैक्लुस्कीगंज वासियों की बेहतर स्वास्थ्य चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गुहार लगा लगाकर थक चुकी हैं. वहीं स्थानीय समाजसेवी व जनप्रतिनिधियों सहित अन्य को कई बार आग्रह किया गया है. लेकिन उक्त विभाग में उनकी सुनने वाला कोई नहीं है.

पीएचसी के भरोसे मैक्लुस्कीगंजवासी : पीएचसी में एक डॉक्टर रवींद्र कुमार शुक्रवार को मौजूद रहते हैं. वहीं डॉ मुकेश कुमार मिश्रा सोमवार व शनिवार को और डॉ इशानी सिंह मंगलवार और बुधवार को रांची से अपनी सेवा देने जरूर आते हैं. वहीं एमपीडब्ल्यू सुमित कुमार, एएनएम अनिता मुंडा, पुतुल कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, स्वीपर सिलविया टोप्पो, गार्ड बिनू बैठा पूरे सप्ताह सेवा दे रही हैं. एक एंबुलेंस मुहैया कराया गया है. सोलर सिस्टम डेढ़ वर्षों से खराब है. सुदूर गांव से आयी गर्भवती महिलाओं का डिलीवरी क्षेत्र में तैनात एएनएम द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्रों या फिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मैक्लुस्कीगंज में कराया जाता है. मामला सीरियस होने पर एंबुलेंस से रांची रेफर कर दिया जाता है.

फ़ोटो 1 – सुविधाविहीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मैक्लुस्कीगंज.

डाक्टरों की कमी की वजह से मैक्लुस्कीगंज एवं आसपास के ग्रामीणों को मजबूरन झोला छाप डाक्टरों की सेवायें लेनी पड़ती हैं.B

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By ROHIT KUMAR MAHT

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