वरीय संवाददाता, रांची. जज के नाम से रांची स्थित सीआरपीएफ डीआइजी को फर्जी ई-मेल भेजने के मामले में आरोपी तौसिफुल हक ने विधानसभा थाना की पुलिस को नोटिस का जवाब भेजा है. कहा है कि मैं पेशे से अधिवक्ता हूं. मेरे पिता स्वर्गीय फरीदुल हक न्यायिक अधिकारी थे. उनका निधन वर्ष 2020 में हो गया है. मैं कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं. वर्ष 2012 से मैं बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित हूं, जिसका इलाज डॉ अभिषेक पाठक (पाठक न्यूरो-साइकियाट्री क्लीनिक, लखनऊ) की देखरेख में चल रहा है. उपरोक्त मामले से मेरा कोई संबंध नहीं है. मैं पूरी तरह से निर्दोष हूं. चूंकि मैं बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित हूं, इसलिए मैं अकेले कहीं भी यात्रा नहीं कर पाऊंगा. इसलिए मैं आपके नोटिस का जवाब रजिस्टर्ड पोस्ट के माध्यम से दे रहा हूं, लेकिन मैं जांच के दौरान पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हूं. अधिवक्ता ने कहा है कि मेरे व्हाट्सऐप नंबर 9559676112 पर 19 जनवरी, 2025 को धारा 35(3) बीएनएसएस के तहत नोटिस प्राप्त हुआ है. मेरा इस मामले से कोई संबंध नहीं है. मुझे इस मामले के बारे में तब पता चला, जब मुझे तीन जनवरी 2025 को यह नोटिस प्राप्त हुआ. मामले की जानकारी लेने और एफआइआर की कॉपी पढ़ने के बाद मैंने देखा है कि उपरोक्त एफआइआर में मेरा नाम नहीं है. जहां तक फर्जी ई-मेल का सवाल है, मैंने कोई फर्जी ईमेल-आइडी नहीं बनायी है. न ही मैं उस आइडी से संदेश भेजता हूं, न ही मेरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का इस्तेमाल फर्जी ई-मेल आइडी बनाने के लिए किया गया है. उल्लेखनीय है कि मामले में थाना आकर अपना पक्ष रखने के लिए आरोपी को पुलिस ने अभी तक 41ए के तहत तीन बार नोटिस दिया है.
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