बजट बना, पैसा आया… पर योजनाएं अधूरी रह गयीं

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने झारखंड सरकार के वर्ष 2023-24 के राज्य वित्त पर प्रतिवेदन विधानसभा में प्रस्तुत किया.

रांची. भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने झारखंड सरकार के वर्ष 2023-24 के राज्य वित्त पर प्रतिवेदन विधानसभा में प्रस्तुत किया. रिपोर्ट में राजस्व अधिशेष और राजकोषीय अनुशासन में सुधार की सराहना की गयी है, लेकिन योजनाओं पर धन के समुचित उपयोग में लापरवाही को गंभीर चिंता बताया गया है. वर्ष 2023-24 में राज्य सरकार का कुल व्यय 84,908 करोड़ से बढ़कर 1,01,537 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19.58% अधिक है. इसमें राजस्व व्यय 76,676 करोड़ रहा. राजस्व अधिशेष (रेवेन्यू सरप्लस) 11,252 करोड़ रुपये रहा, जो 2019-20 के 1,960 करोड़ से काफी अधिक है. राजकोषीय घाटा घटकर 6,332 करोड़ (जीएसडीपी का 1.37%) रह गया. राज्य का कुल ऋण जीएसडीपी का 27.68% रहा, जो निर्धारित सीमा 30.60% से कम है. राजस्व प्राप्तियां 9.57% की दर से बढ़ीं, स्वयं कर राजस्व में 11.49% और केंद्रीय कर हस्तांतरण में 19% की वृद्धि हुई. हालांकि, केंद्र सरकार की सहायता अनुदान घटकर 10.40% रह गयी. पूंजीगत मद में 20,570 करोड़ और सब्सिडी पर 4,831 करोड़ खर्च हुए, जिसमें बिजली क्षेत्र का हिस्सा 48% रहा. सीएजी ने बताया कि 1,41,498 करोड़ के प्रावधानों में से 32,744 करोड़ बिना उपयोग के रह गये. 31 मार्च 2024 तक 47,367 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित थे. 4,891 करोड़ के 18,011 एसी बिलों के विरुद्ध डीसी बिल जमा नहीं हुए. राज्य की 32 सरकारी कंपनियों में से 30 के 107 वित्तीय खाते 31 अक्तूबर 2024 तक लंबित पाये गये, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं.

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Published by: Praveen

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