Ranchi News : सरकार वित्त विभाग के ऑडिटर से शराब दुकानों का ऑडिट करायेगी

राज्य की शराब दुकानों का ऑडिट अब वित्त विभाग की देखरेख में किया जायेगा. इसके लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने वित्त विभाग को पत्र लिखा है.

रांची. राज्य की शराब दुकानों का ऑडिट अब वित्त विभाग की देखरेख में किया जायेगा. इसके लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने वित्त विभाग को पत्र लिखा है. वित्त विभाग से दुकानों का ऑडिट कराने के लिए ऑडिटर देने का आग्रह किया गया है. अब तक प्राइवेट एजेंसी शराब दुकानों का ऑडिट करती थी. वित्त विभाग से ऑडिटर मिलने के बाद राज्य की खुदरा शराब दुकानों के हैंडओवर और टेकओवर की प्रक्रिया शुरू होगी. वित्त विभाग के ऑडिटर की देखरेख में पहले स्टॉक और हिसाब का मिलान होगा. राज्य में अब तक प्लेसमेंट एजेंसी खुदरा शराब दुकानों का संचालन कर रही थी.

प्लेसमेंट एजेंसी 30 जून के बाद शराब की बिक्री नहीं करेगी

प्लेसमेंट एजेंसी 30 जून के बाद शराब की बिक्री नहीं करेगी. इसके बाद नयी उत्पाद नीति के तहत दुकानों की बंदोबस्ती होने तक जेएसबीसीएल ( झारखंड स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड) की देखरेख में शराब की बिक्री होगी. इसके लिए दुकानों के हैंडओवर-टेकओवर की प्रक्रिया 20 जून तक शुरू होगी. वित्त विभाग के ऑडिटर जब दुकानों के स्टॉक से लेकर बिक्री तक का ऑडिट कर लेंगे, उसके बाद जेएसबीसीएल दुकान अपने अधीन लेगा.

शराब दुकानों से 100 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान

राज्य में अब तक प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से शराब दुकानों का ऑडिट होता था. राज्य की शराब दुकानों से लगभग 100 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ है. इसकी भरपाई अब तक नहीं हुई है. इसमें शराब बिक्री के बाद राशि जमा नहीं करने से लेकर दुकानों में हुई चोरी से नुकसान की राशि शामिल है. विभाग का मानना है कि अगर समय पर ऑडिट व इसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई होती, तो शराब बिक्री के बाद राशि जमा नहीं करने पर रोक लग सकती थी.

प्राइवेट एजेंसी ने ठीक से नहीं किया काम : मंत्री

उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि विभाग ने मुख्यालय व जिला स्तर पर ऑडिट को लेकर एजेंसी चुनी थी. एजेंसी द्वारा सही तरीके से काम नहीं करने के कारण आज राशि जमा नहीं करने का मामला सामने आ रहा है. उन्होंने कहा कि स्थिति यह है कि अब तक मई माह की रिपोर्ट जमा नहीं हुई है. दुकानों का जब रोज ऑडिट होना है, तब ऐसी स्थिति क्यों है. इन्हें हर दुकान में जाकर ऑडिट करना था. लेकिन जानकारी मिली है कि टेलीफोन पर भी दुकानों का ऑडिट किया गया है. इस कारण अब वित्त विभाग से ऑडिटर की मांग की गयी है, जिससे कि पूर्व में हुए ऑडिट की सत्यता की भी जांच हो सके.

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Published by: Prabhat gopal jha

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