सुदिव्य कुमार सोनू की मौत का पैनलिस्ट डॉक्टर ने खोला राज, मेडिकल रिपोर्ट सबसे पहले प्रभात खबर के पास

दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उनकी मेडिकल रिपोर्ट पर पहली बार विस्तार से जानकारी सामने आई है. कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि शुरुआती लक्षण हार्ट अटैक की ओर इशारा कर रहे थे, लेकिन इलाज में देरी ने जान बचाना मुश्किल बना दिया.


रांची से राजलक्ष्मी की रिपोर्ट

Sudivya Sonu Medical Report: झारखंड सरकार के दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उनके इलाज से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट पर पहली बार विस्तार से जानकारी सामने आई है. ये मेडिकल रिपोर्ट सबसे पहले सिर्फ प्रभात खबर के पास आई है. इस मेडिकल रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कार्डियोलॉजिस्ट डॉ दीपक गुप्ता ने इलाज के दौरान तैयार हुई रिपोर्ट के आधार पर पूरी घटनाक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि शुरुआती लक्षण हार्ट अटैक की ओर इशारा कर रहे थे और अस्पताल पहुंचने तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी.

शनिवार की रात 12 बजे सीने में उठा था दर्द

डॉ गुप्ता के अनुसार, रिपोर्ट में दी गई जानकारी बताती है कि सुदिव्य कुमार सोनू को शनिवार रात करीब 12 बजे के आसपास सीने में दर्द शुरू हुआ था. हालांकि उन्हें अस्पताल करीब 2:15 बजे गंभीर अवस्था में लाया गया. उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक में हर मिनट बेहद अहम होता है और इलाज में देरी मरीज की जान बचाने की संभावना को प्रभावित कर सकती है.


चेस्ट पेन को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी

डॉ दीपक गुप्ता ने बताया कि अक्सर लोग शुरुआती सीने के दर्द को गैस या सामान्य परेशानी समझकर घर पर ही इंतजार करते रहते हैं. कई बार लोग एंटासिड जैसी दवा लेकर राहत मिलने का इंतजार करते हैं, जबकि हार्ट अटैक में यही शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने कहा कि युवा या अपेक्षाकृत फिट दिखने वाले लोगों में भी हार्ट अटैक हो सकता है. पहली बार लक्षण आने पर मरीज और परिवार दोनों असमंजस में रहते हैं, जिससे अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाती है.

अस्पताल पहुंचते-पहुंचते बिगड़ चुकी थी हालत

डॉ दीपक गुप्ता के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के समय सुदिव्य कुमार सोनू की स्थिति बेहद गंभीर थी. रिपोर्ट में चेस्ट पेन के साथ उनकी हालत क्रिटिकल बताई गई थी. इसी दौरान उन्हें उल्टी हुई, जिसके कारण उल्टी का पदार्थ सांस की नली में चला गया. मेडिकल भाषा में इसे एस्पिरेशन कहा जाता है, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत पैदा हो सकती है.

ब्लड प्रेशर भी नहीं हो पा रहा था रिकॉर्ड

रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने के समय उनका ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था, जबकि पल्स भी सामान्य रूप से महसूस नहीं हो रही थी. डॉ. गुप्ता ने बताया कि यह स्थिति कार्डियोजेनिक शॉक की ओर संकेत करती है, जिसमें हृदय शरीर को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंचा पाता.

ICU में चला इलाज, लेकिन नहीं बच सकी जान

रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती किया. उनकी सांस की नली में ट्यूब डालकर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया. ईसीजी में फ्लैट लाइन जैसी गंभीर स्थिति दर्ज होने के बाद लगातार सीपीआर दिया गया और विशेषज्ञों से सलाह भी ली गई. डॉ दीपक गुप्ता ने बताया कि उनकी हालत ऐसी नहीं थी कि उन्हें तत्काल रांची रेफर किया जा सके. प्राथमिक इलाज वहीं करना जरूरी था. इलाज के दौरान उन्हें दूसरा कार्डियक अरेस्ट आया और तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.

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हार्ट अटैक में समय ही सबसे बड़ा हथियार

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ दीपक गुप्ता ने कहा कि यह घटना लोगों के लिए एक बड़ी सीख है. यदि सीने में अचानक तेज दर्द, घबराहट, पसीना, उल्टी या सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायत हो तो बिना देर किए तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए. उनके मुताबिक, हार्ट अटैक में "टाइम इज मसल" का सिद्धांत लागू होता है, यानी इलाज में जितनी जल्दी होगी, मरीज के बचने की संभावना उतनी ही बढ़ेगी.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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